दैनिक भास्कर हिंदी: ‘एक और संघर्ष’ से फौजी बेटे ने मां को दिया कोरोना से बचने का संदेश

June 12th, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोरोना महामारी से बचाव के लिए डॉक्टर, नर्स, पुलिस कर्मी और सफाई कर्मी कोरोना योद्धा के रूप में सामने आ रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर सेना के जवानों का संघर्ष है। सेना के जवान महामारी से लड़ने के साथ ही देशवासियों की सुरक्षा की खातिर दिन-रात डटे हुए हैं। देश की सीमाओं पर आतंकी खतरोंं का साया मंडरा रहा है। सेना के जवानों के परिवारजन भी मानसिक लड़ाई लड़ रहे हैं। शहर के कलाकारों ने कोरोना और देश के जवानों पर एक लघु फिल्म ‘एक और संघर्ष’ बनाई है। 10 मिनट की फिल्म मेजर जय और उसकी मां के संवाद पर आधारित है।

फिल्म का निर्देशन सचिन गिरि ने किया है। संवाद उर्मिला देशपांडे के है। संचालन पार्थ तिवारी ने किया है। संगीत आकाश नारंजे का है। फिल्म में मुख्य कलाकार उर्मिला देशपांडे और निखिल टोंगले हैं।

22 दिन बाद अपने बेटे से बात कर पाती हैं मां
फिल्म की कहानी में बताया गया है कि मां सीमा पर तैनात अपने फौजी बेटे मेजर जय से बात करना चाहती हैं, लेकिन बात नहीं हो पाती है। एक दिन अचानक बेटे का फोन आता है, जिससे मां को खुशी का ठिकाना नहीं रहता। मां कहती है-बेटा 22 दिन बाद तुमसे बात हो पा रही है। इस दौरान मां-बेटे के बीच कोरोना संबंधी संवाद होते हैं। बेटा कहता है कि मां, आप सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन तो कर रहे हैं। मां आपको तो डायबिटीज है। आप अपना ध्यान रखिए। हां, एक बात मन में चुभती है कि लॉकडाउन में आपकी कोई मदद नहीं कर पा रहा हूं।

मां कहती है-बेटा, तुम ऐसा क्यों सोचते हो, तुम तो देश की तमाम माताओं की सुरक्षा करने के लिए सीमा पर तैनात हो। मुझे तुम पर गर्व है। बेटा कहता है-मुझे भी आप पर गर्व है मां। फिर मां-बेटे दोनों एक-दूसरे का ध्यान रखने को कहते हैं। फिल्म के माध्यम से कोरोना से बचाव का संदेश दिया गया है। साथ ही सभी को घर पर सुरक्षित रहने की बात कही गई है। जब कोरोना योद्धा और देश के जवान हमारी रक्षा के लिए तैनात हैं, तो बिना कारण घर से बाहर न निकलें। कोरोना संबंधी सरकार के निर्देशों का पालन करें।

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