गड़चिरोली: कमलापुर के हाथियों का स्थानांतरण तय होते ही बढ़ने लगा विरोध

May 13th, 2022

डिजिटल डेस्क, अहेरी (गड़चिरोली)। राज्य के एकमात्र अहेरी तहसील के कमलापुर स्थित वनविभाग के हाथी कैम्प में मौजूद 8 में से 4 हाथियों के स्थानांतरण का फैसला केंद्र सरकार ने तय कर दिया है। आगामी कुछ ही दिनों में यह हाथी गुजरात के जामनगर स्थित राधे कृष्ण टेंपल एलिफैंट वेलफेयर ट्रस्ट को सौंप दिए जाएंगे। लेकिन सरकार के इस फैसले से अब स्थानीय लाेगों में तीव्र असंतोष की लहर उमड़ने लगी है। प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) युवराज एस. द्वारा इस आशय की जानकारी पत्रकारों से साझा करते ही गड़चिरोली में कार्यरत सामाजिक संगठनों ने अब आंदोलन करने का निर्णय ले लिया है। हाथियों के स्थानांतरण के खिलाफ अब तक यहां कार्यरत जनप्रतिनिधियों ने भी आवाज उठाई  थी। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने स्थानांतरण का फैसला लिया है। इन हाथियों के चलते ही कमलापुर पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आया है। लेेकिन अब इन्हीं हाथियों का स्थानांतरण किया गया तो क्षेत्र का विकास अवरुद्ध होगा। इसी चिंता के चलते लोगांे में असंतोष की लहर उमड़ने लगी है। 
 
बता दें कि, ब्रिटिशकाल के दौरान दक्षिण गोदावरी जिले में कमलापुर वनक्षेत्र का समावेश किया गया था। इस दौरान यहां मौजूद हाथियों की मदद से सागौन के बड़े लट्‌ठों की ढुलाई की जाती थी। आजादी के बाद यहां मौजूद सभी हाथियों को वनविभाग को सौंप दिया गया। कुछ दिनों तक सागौन लट्‌ठों की ढुलाई का कार्य जारी रहा। मात्र वन्यजीव के संबंध में कानून का प्रावधान होते ही हाथियों से यह कार्य करवाना बंद किया गया। तभी से यहां हाथियों का झुंड मौजूद है। वर्तमान में कमलापुर के हाथी कैम्प में अजीत, गणेश, बसंती, प्रियंका, मंगला, रूपा, रानी और लक्ष्मी आदि 8 हाथी मौजूद है।  पिछले एक वर्ष की कालावधि में यहां के 2 हाथियों की मृत्यु भी हुई थी। मौजूद 8 में से 4 हाथियों के स्थानांतरण का फैसला लिया गया है, जिसके कारण लोगों में असंतोष की लहर उमड़ने लगी है। सामाजिक संगठनों ने इस प्रक्रिया के विरोध में जनआंदोलन करने की चेतावनी भी दी है। 

सरकारी फैसला गलत 
कमलापुर के हाथी कैम्प में प्रतिदिन दर्जनों की संख्या पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्रदेश के अन्य जिलों समेत छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश राज्य के पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं। लेकिन हाथियों के स्थानांतरण का फैसला केंद्र सरकार ने लिया है, जिससे पर्यटकों को निराशा का सामना करना पड़ेगा। इस फैसले के खिलाफ लोगों को साथ लेकर जनाक्रोश आंदोलन के साथ ठिया आंदोलन भी किया जाएगा।  -अश्विन मडावी, अध्यक्ष भगतसिंह फैन्स क्लब, अहेरी 

कैम्प से मिली है नई पहचान 
हाथी कैम्प के चलते कमलापुर गांव को नई पहचान मिली है। हाथियों के स्थानांतरण का लगातार विरोध जारी है। पहले इसी कमलापुर को नक्सलियों के पैत्रूक गांव के रूप में पहचाना जाता था। लेकिन अब कमलापुर की पहचान हाथियाें से होने लगी है। सरकारी फैसले के खिलाफ जल्द आंदोलन होगा।  -रजनिता मडावी, पूर्व सरपंच कमलापुर