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बालाघाट में बीजेपी की मुश्किल, टिकट कटने से खफा सांसद बोधसिंह ने निर्दलीय भरा नामांकन

बालाघाट में बीजेपी की मुश्किल, टिकट कटने से खफा सांसद बोधसिंह ने निर्दलीय भरा नामांकन

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। बीजेपी सांसद बोधसिंह भगत ने निर्दलीय नामांकन भर दिया है। वे पार्टी द्वारा ढालसिंह बिसेन को टिकट देने से नाराज चल रहे थे। बीजेपी के कई नेताओं ने भगत को मनाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने निर्दलीय नामांकन भर दिया। इससे पहले पिछले सप्ताह प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत बोधसिंह को मनाने बालाघाट पहुंचे थे, लेकिन वे नहीं माने।

वहीं सोमवार को बीजेपी प्रत्याशी ढालसिंह बिसेन ने अपना नामांकन जमा कर दिया। मौजूदा सांसद बोधसिंह ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुझसे बातचीत की थी। उन्होंने मुझे नामांकन नहीं भरने का आग्रह किया। भगत ने कहा, 'मैंने साफ कर दिया कि अभी वक्त है। टिकट बदल दो, पार्टी का भला होगा।' उन्होंने कहा कि पार्टी ने सिर्फ गौरीशंकर बिसेन के दबाव में मेरा टिकट कटा है। मैंने क्षेत्र में जितने विकास कार्य कराए, उतने मंत्री रहते हुए गौरीशंकर बिसेन ने नहीं कराए। इसके बाद भी मेरा टिकट काटा गया। भगत ने आगे कहा कि ढाल सिंह कमजोर प्रत्याशी है। वह चुनाव जीतने वाले नहीं है। वो सिवनी जिले के रहने वाले हैं। अगर योग्य हैं तो सिवनी से चुनाव लड़ते। 

2014 में सांसद बने थे भगत

बीजेपी ने 2014 के चुनाव में बोधसिंह भगत पर दांव लगाया था। मोदी लहर में वो जीतकर संसद पहुंचे और आश्वस्त थे कि पार्टी दोबारा उन्हें मौका देगी। हालांकि ऐसा हो नहीं सका। एक तरफ पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी के लिए टिकट मांग रहे थे, वहीं वो हर हाल में बोधसिंह की उम्मीदवारी के विरोध में थे। ऐसे में ढालसिंह बिसेन को टिकट मिलने से बोधसिंह भगत नाराज हो गए। माना ये भी जा रहा है कि गौरीशंकर बिसेन के दबाव में उनका टिकट कटा है। 

बिगड़ सकते हैं बीजेपी के समीकरण

बालाघाट संसदीय क्षेत्र में बालाघाट जिले की 6 और सिवनी जिले की बरघाट और सिवनी विधानसभा सीटें आती हैं। बीजेपी ने सिवनी जिले के रहने वाले ढालसिंह बिसेन को प्रत्याशी बनाया है। ढालसिंह 2008 और 2013 में विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। 2018 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। बोधसिंह भगत मौजूदा सांसद हैं और उनकी टिकट कटने से बीजेपी का एक धड़ा नाराज चल रहा है। माना जा रहा है कि अंसतुष्टों का खेमा बोधसिंह के साथ जा सकता है। यहां कांग्रेस ने पूर्व विधायक मधु भगत पर दांव लगाया है। दिलचस्प बात ये है कि तीनों प्रत्याशी बोध सिंह भगत, ढालसिंह बिसेन और मधु भगत पवार समाज से आते हैं। जो जिले में बाहुल्य है। इसके अलावा पूर्व सांसद कंकर मुंजारे भी किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी के पास बालाघाट सीट 1998 से है, लेकिन गुटबाजी के चलते इस बार बाजी अगर पलट जाए तो हैरत नहीं होगी।

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