दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर में शुरू होगा बिल्डिंग इफिशियंसी ऐक्सेलरेटर प्रोजेक्ट

January 24th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। तेजी से विकास की सीढ़ी पर बढ़ रहे नागपुर का चयन दुनिया के उन आठ शहरों में किया गया, जहां बिल्डिंग इफिशियंसी ऐक्सेलरेटर (बीईए) सस्टेनेबल एनर्जी  फॉर ऑल प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य 2030 तक शहरों में बनने वाली नई इमारतों का उच्च स्तरीय ऊर्जा दक्षता और जीरो कार्बन उत्सर्जन की क्षमता से लैस होना है। वर्ष 2050 तक शहर की सभी इमारतों को इस श्रेणी में लाए जाने का लक्ष्य है। दुनिया के आठ शहरों का चयन अमेरिका के नेशनल एनवॉयरमेंट प्रोग्राम के तहत जारी प्राजेक्ट एनजीओ एक्सक्यूटिंग ग्लोबल एनवॉयरमेंट फैसिलिटी (जीईएफ) और वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई) ने किया है। प्रोजेक्ट के निष्पादन के लिए डब्ल्यूआरआई ने दिल्ली के एनजीओ आईसीएलईएल को नियामक संस्था नियुक्त किया है। 

नागपुर में इन्हें जिम्मेदारी
नागपुर में मनपा ने प्राजेक्ट के कार्यान्वयन के लिए नागपुर स्मार्ट सिटी स्पेशल नागपुर स्मार्ट एंड सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एनएसएससीडीसीएल) को जिम्मेदारी दी है। गत शनिवार को डब्ल्यूआरआई, आईसीएलईएल और एनएसएससीडीसीएल के बीच संबंधित करार हुआ। एनएसएससीडीसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर प्रवीण परदेशी ने प्रोजेक्ट को एनएसएससीडीसीएल के तहत काम करने संबंधी मंजूरी प्रदान कर दी है। प्राजेक्ट के तहत मनपा के जरिए एनएसएससीडीसीएल इमारतों के निर्माण में ऊर्जा दक्षता संबंधी मानक के लिए कुछ अतिरिक्त निर्माण कार्य किए जाने का प्रावधान करेगा। इसके लिए शहर में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

ऊर्जा खपत में कमी 
एनएसएससीडीसीएल अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2021 तक परंपरागत ऊर्जा खपत में 10 फीसदी कमी का लक्ष्य तय किया है। 
सस्टेनेबल एनर्जी फॉर ऑल मूवमेंट  
अमेरिका की पहल पर जारी सस्टेनेबल एनर्जी फॉर ऑल मूवमेंट  में तीन बातों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। दुनिया भर में सभी तक आधुनिक ऊर्जा की पहुंच तय करना, ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा की खपत को दोगुना करना।

जानें, क्या है बिल्डिंग इफिशियंसी ऐक्सेलरेटर 
संयुक्त राष्ट्र की पहल पर शुरू की गई बिल्डिंग इफिशियंसी ऐक्सेलरेटर के तहत सरकार व निजी क्षेत्र के संयुक्त पहल पर स्थानीय निकायों को इमारतों का ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए कार्यक्रम और नीतियां तैयार करने और लागू करने की योजना है।

इमारतों के ऊर्जा दक्ष बनने से यह होगा फायदा
किसी भी शहर में ऊर्जा मांग का एक तिहाई और कार्बन उत्सर्जन का एक चौथाई इमारतों में होता है। ऊर्जा दक्षता को अपनाकर वर्ष 2050 तक मांग को एक तिहाई तक कम किया जा सकता है। इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा तकनीकी और वित्तीय नहीं, संस्थात्मक और व्यवहार है। बीईए इन्हीं बाधाओं को दूर करने के लिए वैश्विक स्तर पर सभी क्षेत्रों में साक्षा प्रयास को बढ़ावा देने की योजना है। 

ऊर्जा दक्षता समय की मांग
स्मार्ट सिटी, मिहान, मेट्रो, आई पार्क, विशाल व्यावसायिक इमारतों के जरिए नागपुर में आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में अहम विकास जारी है। बढ़ती गतिविधियों के कारण ऊर्जा की मांग में भी काफी वृद्धि हुई है और इसके साथ ही ऊर्जा खपत में 20 से 40 फीसदी के बचत की संभावना भी बन रही है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण परियोजना के तहत शुरू की गई  बिल्डिंग इफिशियंसी ऐक्सेलरेटर(बीईए) विभिन्न सरकारी संस्थाओं को ऊर्जा खपत के क्षेत्र में सर्वोत्तम नीति अपनाने और इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रेरित करती है। 
-डॉ रामनाथ सोनवणे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्मार्ट सिटी प्रकल्प