दैनिक भास्कर हिंदी: अपने शावकों को ढूंढ रही कैटरीना बाघिन

June 2nd, 2018

डिजिटल डेस्क, वर्धा। जिस कैटरीना के दर्शन दुर्लभ होते थे आजकल वह कहीं भी लोगों को दिखाई दे रही है। दरअसल जंगल की सुंदरी कैटरीना बाघिन के शावक पिछले कई दिनों से गायब हो गए हैं और अब कैटरीना उन्हें ढूंढते इधर-उधर दिखाई दे रही है।  बता दें कि पहले कैटरीना के दर्शन करना आसान नहीं था। परंतु अब आसानी से पर्यटकों को कैटरीना के दर्शन हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि, कैटरीना अपने शावकों की खोज में भटकने के कारण वह पर्यटकों को नजर आने लगी है।

महात्मा गांधी व भूदान प्रणेता संत विनोबा भावे की कर्मस्थली के तौर पर विख्यात वर्धा जिले में आने वाले सेलू तहसील का बोर व्याघ्र प्रकल्प कैटरीना नामक बाघिन के कारण काफी सुर्खियों में रहा है।  कैटरीना कुछ माह पूर्व गर्भवती थी। बाद में उसने कुछ शावकों को जन्म भी दिया, लेकिन एक भी शावक उसके पास दिखायी नहीं देने से शावक कहां गायब हुए? ऐसा सवाल उपस्थित हो रहा है। कैटरीना के शावक गायब होने से वनविभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्रचिन्ह निर्माण हुआ है। फिलहाल कैटरीना बाघिन अपने शावकों की खोज कर रही है। जिस कारण अपनी जगह न छोड़ते हुए बोरबांध परिसर में भ्रमण कर नियमित  रुप से देखी जा रही है।

जिसके परिणाम स्वरुप बोर व्याघ्र प्रकल्प में जंगल सफारी  के लिए आनेवाले पर्यटकों को कैटरीना के आसानी से दर्शन हो रहे हैं। बताया जाता है कि बोर व्याघ्र प्रकल्प में करीब 24 बाघ-बाघिन है। इतने बडे़ प्रमाण में बाघ-बाघिन होकर भी  इसके वास्तविक आंकड़ों के बारे में वनविभाग जानकारी देने के लिए तैयार नही है। वनविभाग के अधिकारी व कर्मचारी खुद को बचाने के लिए किसी तरह की जानकारी देने के लिए तैयार नहीं होने का आरोप प्राणी प्रेमियों ने लगाया है। शावकों की खोज में भटक रही कैटरीना अधिक नरभक्षी होने की संभावना जतायी जा रही है। परिणाम स्वरुप परिसर के नागरिकों में दहशत देखी जा रही है। उनका खेत में जाना तक मुश्किल हो गया है।