दैनिक भास्कर हिंदी: भय्यूजी महाराज ने नागपुर में की थी तीन मुख्यमंत्रियों की भविष्यवाणी

June 13th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। महाराष्ट्र के तीन राजनेताओं के मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने नागपुर में की थी और संंयोग से वह सच हुई। नागपुर में उनके दो बड़े कार्यक्रम हुए हैं। तीसरा बड़ा कार्यक्रम ‘राष्ट्रचेतना पर्यावरण महायज्ञ’ 16 मई को होने वाला था, लेकिन किसी कारणवश उसे स्थगित कर दिया गया और जून में महायज्ञ होने वाला था। इसके पूर्व ही वे चल बसे।

पहली घटना
एक बार भय्यूजी महाराज नागपुर आगमन के बाद यहां से यवतमाल जिले के उमरखेड़ पहुंचे। उनके साथ नागपुर के कांग्रेस नेता अनंतराव घारड भी थे। दोपहर में टहलते हुए घारड ने बातों-बातों में भैय्यू जी से पूछा-अशोक चव्हाण का क्या होगा? वे तपाक से बोले-मुख्यमंत्री बनेंगे। संयोग से उस शाम यानी 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमला हुआ। उस समय विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री थे। घटना के बाद कुछ ऐसे हालात बने कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री बने।

दूसरी घटना
उस समय सुशील कुमार शिंदे आंध्रप्रदेश के राज्यपाल थे। भाजपा नेता नितिन गडकरी के निवास महल स्थित वाड़ा में शिंदे और भय्यूजी महाराज की मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान भैय्यू जी ने सुशील कुमार शिंदे से कहा कि आप मुख्यमंत्री बन रहे हैं। यह सुनकर एकबारगी शिंदे अवाक रह गए। उन्होंने जब आश्चर्य व्यक्त किया तो भैय्यू जी बोले-15 तारीख को आप त्यागपत्र देंगे। 16 तारीख को विधायक दल के नेता चुने जाएंगे और 17 तारीख को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम कुछ ऐसा बदला कि भय्यूजी की भविष्यवाणी सच साबित हुई। शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।

तीसरी घटना
शहर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबूराव तिडके भैय्यू जी के पुराने शिष्य थे। वे विलासराव देशमुख के करीबी थे। उस समय विलासराव विधायक भी नहीं थे। उन्होंने बगावत कर चुनाव लड़ा और हार गए। फोन पर बातचीत में विलासराव देशमुख ने तिड़के से कहा कि अच्छा नहीं लग रहा है। उन्होंने तिडके को अपने पास बुला लिया। तिड़के ने सीधे भैय्यू जी को फोन पर विलासराव से बात कराई। भैय्यू जी बोले-क्या विलासराव, क्या हुआ। आप मुख्यमंत्री बन रहे हो। चुनाव में हार से दु:खी विलासराव ने कहा-महाराज साहब आप भी मेरा मजाक उड़ा रहे हैं। भैय्यू जी की भविष्यवाणी सच हुई और विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।

नागपुर महाराष्ट्र में शामिल होने के बाद दो राज्यों में बंटा देशमुख परिवार
आध्यात्मिक संत भैय्यूजी महाराज का नागपुर से पारिवारिक संबंध है। अनिल देशमुख व रणजीत देशमुख परिवार से भय्यूजी महाराज का गहरा नाता है। भैय्यूजी महाराज का मूल नाम उदय देशमुख था। जानकार बताते हैं कि सीपी एंड बरार के समय यह परिवार विदर्भ में ही था, लेकिन नागपुर संयुक्त महाराष्ट्र में शामिल होने के बाद अनिल देशमुख का परिवार नागपुर में रह गया और भैय्यूजी महाराज का परिवार मध्य प्रदेश चला गया। हालांकि देशमुख परिवार के कार्यक्रमों में उनका आना-जाना लगातार जारी रहता था। अनिल देशमुख की पुत्री के विवाह समारोह में खुद भय्यूजी महाराज उपस्थित थे। सलिल देशमुख के विवाह समारोह में किसी कारणवश नहीं पहुंच पाए थे, लेकिन तीन-चार दिन बाद उन्होंने नागपुर पहुंचकर सलिल देशमुख को शुभेच्छा दी थी। इस तरह देशमुख परिवार के कार्यक्रमों में उनका आना-जाना लगा रहता था।

आध्यात्मिक क्षेत्र में बड़ा काम किया है
पूर्व मंत्री अनिल देशमुख बताते हैं कि भगवे वस्त्र पहनने की बजाए उन्होंने आध्यात्मिक क्षेत्र में बड़ा काम किया है। आध्यामिक क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भी महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में जलक्रांति, पौधारोपण, आत्महत्याग्रस्त किसानों के बच्चों को दत्तक लेने का काम, उपेक्षित व अनाथ बच्चों का पालन-पोषण का काम और शोषित-निराधारों के आंसू पोंछने का काम किया। उन्होंने कहा कि समाज को तनावमुक्ति का संदेश देने वाले महाराज तनाव की गर्त में कैसे पहुंचे, यह समझ से परे है। उनका काम समाज को प्रेरणा और दिशा देने वाला है। उनकी प्रेरणा से मैं काटोल स्थित पारडसिंगा में पिछले 16 साल से सर्वधर्मीय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन कर रहा हूं। उनका अचानक चले जाना अत्यंत वेदनादायक है।