दैनिक भास्कर हिंदी: भीमा कोरेगांव मामले में सुधीर ढवले समेत तीन लोग नागपुर और पुणे से गिरफ्तार

June 6th, 2018

डिजिटल डेस्क, पुणे।  महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा प्रकरण में पुणे पुलिस ने कार्रवाई करते हुए और चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन्हें पुणे, नागपुर और दिल्ली से पकड़ा गया है। इस मामले में पुलिस ने पहले भी तीन नाबालिगों को अरेस्ट कर चुकी है। ज्ञात हो 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। मामला काफी उग्र होने से पूरे राज्य में इसका असर हुआ था।  इसी मामले में संभाजी ब्रिगेड के संभाजी भिड़े 'गुरुजी' और हिंदू एकता अगाड़ी के अध्यक्ष मिलिंद एकबोटे आरोपी हैं। 

 पुणे व नागपुर से हुई गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक  एड. सुरेंद्र गडलिंग व शोमा सेन को नागपुर से और सुधीर ढवडे को पुणे से गिरफ्तार किया है। इससे पहले भी पुलिस तीन नाबिलगों को गिरफ्तार कर चुकी है। सुधीर ढवले को मंगलवार हिरासत में लिया गया है। तीनों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। आज उन्हें  के शिवाजी नगर कोर्ट में पेश किया गया। इन सभी पर विवादित पर्चे बांटने और हेट स्पीच का आरोप है। 

पुणे से गिरफ्तार हुए ढवले 
पुणे के विश्रामबाग थाने की पुलिस दल ने बुधवार की सुबह साढ़े छह बजे गोवंडी से विद्रोही आंदोलन के कार्यकर्ता व लेखक सुधीर ढवले को हिरासत में लिया। फिलहाल गोवंडी के देवनार पुलिस थाने में उनका बयान दर्ज कराने का काम शुरू है। आगे की कार्यवाही के लिए उन्हें पुणे लाया जाएगा। ढवले दलित कार्यकर्ता है। एससी एसटी एक्ट के प्रभावी अमल के लिए अभियान चलाए हुए हैं। वह रिपब्लिकन पैंथर के संस्थापक सदस्य हैं। कुछ माह पूर्व पुलिस ने उनके घर की तलाशी भी ली थी। ढवले को माओवादियों से संबंधों के आरोप में 2011 में भी गिरफ्तार किया गया था। 

भीमा कोरेगांव में इस वजह से भड़की हिंसा
दलितों के एक समूह ने भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस बीच वढू बुद्रुक इलाके में छत्रपति शंभाजी महाराज के दर्शन करने जा रहा दूसरा गुट रास्ते में आ गया। सामान्य कहासुनी से शुरू हुआ विवाद बाद में व्यापक हिंसा में बदल गया था। इसके बाद महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई जिसमे एक युवक की मौत हो गई थी और सैकड़ों गाड़ियों को आग लगा दी गई थी। इसके बाद पूरे देश में हिंसा भड़क उठी थी। देश के विभिन्न स्थानों पर हुए धरना प्रदर्शनों में अनेक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करोड़ों का सामान नष्ट हो गया था।