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रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी, डॉक्टर व वार्डबॉय ब्लैक में बेचते हुए पकड़ाए

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी, डॉक्टर व वार्डबॉय ब्लैक में बेचते हुए पकड़ाए

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  शहर में कोरोना संक्रमित मरीजों की जीवन रक्षक रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने से रोज मौत हो रही है, वहीं दूसरी तरफ भगवान का दूसरा रूप कहे जाने वाले कुछ डॉक्टर और वार्डबॉय इंसानियत को शर्मसार करते हुए इस इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़े गए हैं। गुरुवार को कामठी और नागपुर में तीन स्थानों पर जोन क्र. पांच की पुलिस टीम ने छापामार कार्रवाई की। इस दौरान निजी अस्पताल के 3 वार्डबॉय और एक डॉक्टर को पकड़ा गया है। उनसे 15 रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। इस कालाबाजारी से अस्पताल और स्थानीय प्रशासन की भी कलई खुल गई है। देर रात तक कार्रवाई जारी थी।  पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है।  देर रात तक कार्रवाई जारी रही।

पुलिस आयुक्त को मिली थी गुप्त सूचना
पुलिस के अनुसार आरोपी बीएएमएस डॉ. लोकेश शाहू, वार्डबॉय शुभम मोहदुरे, कुणाल कोहले और सुमित बांगडे हैं। लोकेश कामठी के आशा अस्पताल के अलावा छत्रपति चौक स्थित निजी व अन्य अस्पतालों मंे अपनी सेवाएं देता है। कुणाल और शुभम वर्धा रोड स्थित स्वस्ततम अस्पताल में वार्डबॉय है। सुमित भी वानाडोंगरी स्थित दत्ता मेघे अस्पताल में वार्डबॉय है। पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार को गुप्त सूचना िमली थी कि लोकेश रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाजाबारी में लिप्त है, जिससे परिमंडल क्र. 5 के उपायुक्त निलोत्पल को इसकी जांच-पड़ताल करने के लिए कहा गया था। उसके बाद उन्होंने अपनी टीम को काम पर लगा दिया। 

सादे लिबास में पहुंचा पुलिसकर्मी
पुलिसकर्मी सादे लिबास में मरीज का रिश्तेदार बनकर लोकेश से मिला। उसने लोकेश से कहा कि मरीज की हालत काफी चिंतानजक है, उसे रेमडेसिविर इंजेक्शन की सख्त जरूरत है। उसके बाद लोकेश दो इंजेक्शन देने के लिए तैयार हुआ, लेकिन इसके लिए प्रति इंजेक्शन 16 हजार रुपए की मांग की। इसके बाद लोकेश ने रुपए लेकर गुरुवार की शाम को कामठी स्थित ड्रैगन टेम्पल पैलेस के पास पुलिसकर्मी को बुलाया। तय योजना के तहत पुलिस ने पहले ही जाल बिछाकर रखा था। जैसे ही लोकेश ने रुपए लेकर इंजेक्शन थमाया, वैसे ही पुलिस ने उसे दबोच लिया। खुद को पुलिस के चंगुल में फंसा देखकर लोकेश हाथ-पैर जोड़ने लगा। 

सिलसिलेवार की गई कार्रवाई
प्रकरण की गंभीरता से सख्ती से पूछताछ करने पर लोकेश ने बताया कि वर्धा रोड स्थित स्वस्ततम अस्पताल के वार्डबॉय कुणाल और शुभम भी उसके साथ मिले हुए हैं। उसके बाद उनके ठिकानों पर भी पुलिस ने छापा मारा। इन दोनों से हुई पूछताछ में सुमित का भी नाम सामने आया। वह वानाडोंगरी स्थित दत्ता मेघे अस्पताल में वार्डबॉय है। सिलसिलेवार हुई इस कार्रवाई के दौरान चारों आरोपियों से कुल 15 रेमडेसिविर इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। कार्रवाई देर रात तक जारी थी। इससे अन्न व औषधि विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया था। 

घरों में छुपाकर रखे थे इंजेक्शन
कालाबाजारी में लिप्त आरोपियों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन अपने घरों में छुपाकर रखे थे। जो अस्पतालों में भर्ती मरीजों के रिश्तेदारों को ऊंचे दाम पर बेच रहे थे। इससे यह सवाल उठ रहा है कि इंजेक्शन वार्डबॉय के हाथ कैसे लगे? प्रकरण में और भी लोगों की लिप्तता होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

जाल बिछाकर डॉ. शाहू को पकड़ा
डाॅ.लोकेश शाहू को हमने जॉल बिछाकर पकड़ा है। उसने हमें 16-16 हजार रुपए दो रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचे हैं। आरोपी डॉ. लोकेश कामठी के आशा अस्पताल और छत्रपति चौक के एक निजी अस्पताल में कार्यरत है। प्रकरण में कौन से अस्पताल की लिप्तता है, इसकी जांच चल रही है। जांच में अस्पताल के नाम का खुलासा किया जाएगा। कार्रवाई जारी है। -निलोत्पल, पुलिस उपायुक्त जोन क्र.5, नागपुर शहर पुलिस

आरोप निराधार है
मेरे कोविड सेन्टर मे रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का ओरोप निराधार है।  किसी ने संबंधित विभाग को गलत जानकारी दी होगी। जांच दल अस्पताल आया था। फार्मेसी में जांच-पड़ताल की गई है। -डॉ. राजेंद्र अग्रवाल, कोविड सेंटर संचालक, आशा अस्पताल

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