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अंध-विश्वास : पूर्वांचल में कोरोना बना देवी मां, हो रही पूजा

June 08th, 2020 16:50 IST
अंध-विश्वास : पूर्वांचल में कोरोना बना देवी मां, हो रही पूजा

हाईलाइट

  • अंध-विश्वास : पूर्वांचल में कोरोना बना देवी मां, हो रही पूजा

डिजिटल डेस्क, कुशीनगर, 8 जून (आईएएनएस)। कोरोना वायरस से निपटने के लिए जब पूरी दुनिया जूझ रही है ऐसे वक्त में बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के सीमावर्ती जिलों में अंध-विश्वास ने लोगों को अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया है। यहां की महिलाएं अब कोरोना वायरस से निजात के लिए कोरोना मईया की पूजा करने लगीं हैं। 10-10 लौंग-लड्डू को रख गड्ढे में पानी भरकर कोरोना वायरस से निजात की कामना कर रही हैं। उनकी यह पूजा सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही है।

कुछ दिन पहले महराजगंज के एक गांव में कोरोना से गांव की रक्षा के लिए महिलाएं विशेष पूजा कर रही थीं, लेकिन अब यह अंध-विश्वास रूपी वायरस कुशीनगर के ग्रामीण इलाकों में पहुंच चुका है। यहां के कुछ गांवों की महिलाएं कोरोना माई की पूजा कर रही हैं। बाकायदा इसके लिए चढ़ावा भी तय कर लिया गया है।

महिलाओं का दावा है कि कोरोना माई को नौ लड्डू और नौ लौंग चढ़ाने से इस वायरस का खात्मा हो जाएगा। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर बिहार राज्य से वायरल एक वीडियो को देखने के बाद को कुशीनगर के भी कुछ स्थानों पर भी ऐसी पूजा की जाने लगी।

बिहार से आए मैसेज-वीडियोज से कुशीनगर में शुरुआत हुई। कुछ स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे पहले इस अंध-विश्वास की शुरुआत बिहार से सोशल मीडिया पर आए संदेशों से हुई। लगभग आधा दर्जन गांवों में कोरोना माई की पूजा और निश्चित चढ़ावा चढ़ाने की सूचनाएं आने लगीं हैं। यहां की महिलाओं का कहना है कि पूजा से कोरोना माई प्रसन्न होंगी और उनके गांव पर इस बीमारी का असर नहीं पड़ेगा।

हालात यह है कि कुशीनगर जिला मुख्यालय से सटे पडरौना शहर में 4 बजे से ही महिलाओं का जुटना शुरू होने लगा था। महिलाएं खाली जमीन, जूनियर हाईस्कूल और यूएपीजी कॉलेज के खेल मैदान में जुट गई और वहां जमीन पर छोटा गड्ढा बनाकर उसमें पानी भर दिया। फिर, कोविड-19 को महिलाओं ने कोरोना माई का नाम दिया और पूजापाठ शुरू कर दी। इस दौरान महिलाओं ने गड्ढे के सामने नौ लड्डू और नौ लौंग चढ़ाकर पूजा की। बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारियों ने इसकी सुधि लेना मुनासिब नहीं समझा। बताया जा रहा है कि सुबह शुरू हुई पूजा पाठ का सिलसिला चलता रहा। यह जिले के तमकुहीराज, कसया, हाटा, कप्तानगंज, खड्डा तहसील क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।

बृजकिशोर शर्मा, नवीन कुमार सिंह, सनोज आदि का कहना है कि कोरोना माई की पूजा से जुड़े कई मैसेज और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। प्रशासन को ऐसे वीडियोज और संदेशों पर तत्काल अंकुश लगाना चाहिए। ताकि कोरोना के नाम पर लोग जाने-अनजाने गलत धारणाओं के शिकार न बनें।

लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र के सहायक आचार्य पवन कुमार मिश्रा ने बताया, यह आदर युक्त भय है। पहले चेचक को लेकर भी ऐसा था। उन्हें माता मानकर साफ-सफाई की जाती थी। जन साधारण में बैठे ऐसे अस्थाओं से समाज द्वारा वैज्ञानिक तरीके से निभाई जाने वाली स्वच्छता की आदतें इनके पूजा पाठ की प्रक्रिया का हिस्सा बन जाती है। साफ सफाई का विज्ञान आस्था के साथ जुड़ जाता है। कोरोना को माई मान ली गई है। इसके साथ पूजा-पाठ की प्रक्रियाएं स्वच्छता के विज्ञान से जुड़ गयी है। जनसमान्य ऐसी विकसित आस्था विज्ञान के क्रियाकलापों में बढ़ावा देता है। इन सब प्रक्रियाओं को जनसमान्य को मानसिक धरातल पर इस तरह की आस्थाओं से एक मजबूती मिलती है। जो बीमारी से लड़ने में सहायक होती है। इस बारे में जिले के प्रशासनिक अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया है।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।