दैनिक भास्कर हिंदी: वक्त पर काम नहीं आ पाए ब्रेन डेड मरीज के अंग, नाराज हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

August 12th, 2017

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई के हीरानंदानी हॉस्पिटल को अंग प्रत्यारोपण का लाइसेंस निलंबित होने से कुछ जिंंदगियों को बचाने की कोशिश नाकाम हो गईं। इस पर नाराज बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि उसके पास आपात स्थिति में किसी मरीज के अंग प्रत्यारोपण की क्या व्यवस्था है? सरकार के पास ऐसी व्यवस्था है भी या नहीं। court ने सरकार से 2 सप्ताह के भीतर, जवाब देने को कहा है।

हाथ पर हाथ धरे बैठी रही सरकार 

हीरानंदानी हॉस्पिटल में ब्रेन डेड मरीज की बुधवार को मौत हो गई। मौत से पहले इस मरीज के पांच अंग सक्रिय थे। जिनका इस्तेमाल किसी और को जीवनदान देने के लिए किया जा सकता था, किंतु सरकार की ओर से समय पर जरूरी कदम न उठाए जाने के चलते अंग नहीं निकाले जा सके। मरीज को 8 अगस्त को ब्रेनडेड घोषित किया गया था। जस्टिस अनूप मोहता व जस्टिस भारती डागरे की बेंच ने इस तथ्य को जानने के बाद कि कहा कि सरकार डाॅक्टरों की एक ऐसी टीम बनाए, जिसके पास सारी सुविधाएं हो। यदि किसी हॉस्पिटल से स्वास्थ्य सेवा निदेशालय को अंग निकालने की अनुमति को लेकर फोन आता है तो वह टीम पहले वहां पर पहुंचे और अंगों को निकालने में अपना सहयोग दे। बेंच ने कहा कि भविष्य में दोबारा किसी मरीज के अंग बरबाद न हो, इसके लिए हम दिशा-निर्देश भी बनाएंगे।

क्या है मामला

किडनी के मरीज स्वप्निल राउत की ओर से दायर याचिका में अनुरोध किया गया था कि राज्य के स्वास्थ्य सेवा निदेशक को निर्देश दिया जाए कि वह हीरानंदानी हॉस्पिटल में भर्ती ब्रेन डेड मरीज मनीष मेहता के सक्रिय अंगों को निकालने की अनुमति प्रदान करें। याचिका में कहा गया था कि ब्रेन डेड मरीज की आंखें, फेफड़े, किडनी, लीवर व हृदय सक्रिय हैं। बुधवार को सरकारी वकील ने इस पर जवाब देने के लिए समय मांगा था। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा था कि हीरानंदानी हॉस्पिटल के कई डाॅक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज है और हॉस्पिटल को दिए गए अंग प्रत्यारोपण के लाइसेंस को निलंबित कर दिया गया है। इसलिए हॉस्पिटल को ब्रेनडेड मरीज के अंगों को निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। फिलहाल मामले की सुनवाई 24 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है।

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