दैनिक भास्कर हिंदी: मामूली बातों पर टूट रही शादियां, नागपुर फैमिली कोर्ट में तलाक के 6000 केस लंबित

April 19th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  शहर में हर दिन औसतन तीन घर टूटते हैं और कई बार अलगाव की वजह मामूली होती है। आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद प्रेम विवाह करने वाले मनीष वर्मा और कोयल वर्मा सिर्फ इस बात पर अलग हो गए कि ऑफिस से लौटने पर खाना कौन बनाएगा। पति-पत्नी दोनों समान रूप से शिक्षित, समान पद पर और समान वेतन पाने वाले थे। कोयल के अनुसार, खाना बनाना सिर्फ उसकी जिम्मेदारी नहीं थी। सीमा पराते (परिवर्तित नाम) पति समर्थ पराते से इस बात पर खफा होकर तलाक की अर्जी लगा दी कि समर्थ ने बगैर उससे पूछे अपनी भाभी को उनके जन्मदिन पर उपहार दिया।  यह सूची अंत:हीन हो सकती है। आज पति-पत्नी के बीच छोटी मोटी अनबन तक तलाक का कारण बन जाती है। नागपुर फैमली कोर्ट की प्रिंसिपल जज और लेस्ट टॉक की हेड ऑफ काउंसिलिंग सेंटर मंगला ठाकरे के अनुसार फिलहाल नागपुर फैमिली कोर्ट में तलाक के लगभग 6000 केस लंबित हैं।

बात बिगड़ते-बिगड़ते काफी बिगड़ जाती 
परामर्शक मनीषा कोठेवार के अनुसार, मामूली बातों से शुरू हुई बात बिगड़ते-बिगड़ते काफी बिगड़ जाती है। हालांकि शुरूआत में दोनों पक्ष बड़े आरोप लगाते हैं और बढ़ा चढ़ाकर एक दूसरे की कमियां बताते हैं। कई सीटिंग के बाद ही विवाद की असली वजह सामने आती हैं और कई बार वह मामूली भी होती है। 

तलाक की बढ़ती संख्या के कारण
 लेस्ट टॉक की हेड ऑफ कांउसिलिंग सेंटर मंगला ठाकरे के अनुसार, तेजी से बदलते सामाजिक तानेबाने में विवाह जैसी संस्था को बनाए रखने के लिए सकारात्मक पहल की जरूरत है। लड़कियाें का आत्मनिर्भर होना, परिजनों का अत्यधिक दखल, परिवार से लगातार संपर्क जैसे कई कारण हैं जिनसे तलाक की संख्या बढ़ रही है।  डॉ. मनीषा कोठेवार के अनुसार कई बार युवा शिक्षित तो होती हैं, लेकिन उनका मानसिक विकास उतना नहीं होता है कि वे नई जिम्मेदारियों को संभाल पाएं। ऐसे में छोटी-छोटी बातें बतंगड़ बन जाती हैं। लड़कियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ उनके एडजस्ट करने की भावना की कमी आती जा रही है। 

मामूली विवाद से शुरुआत
फैमिली कोर्ट में अपने मुवक्किल के साथ खड़े एडवोकेट आशीष जायसवाल बताते हैं विवाद शुरू होने का कारण कई बार बेहद मामूली होता है, जैसे मोबाइल पर ज्यादा समय बिताना, दोस्तों के बहुत अधिक फोन या मैसेज आना, खाना कौन बनाएगा, रिश्तेदारों का बहुत अधिक आना जाना, बेपरवाही से ड्राइविंग करना। लेकिन मामले के कोर्ट तक पहुंचने तक कई कारण जुड़ जाते हैं और असली कारण पीछे छूट जाता है। पुलिस को शिकायत करने के बाद कड़वाहट बढ़ जाती है और फिर दोनों में से काेई पीछे हटने का तैयार नहीं होता है। 

कोर्ट में बढ़ते लंबित मामलों और पारिवारिक विवाद को कोर्ट पहुंचने से पहले बातचीत कर सुलझाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर परिवार विवादों को कोर्ट पहुंचने से पहले सकारात्मक परामर्श के जरिए हल करने के उद्देश्य से 3 दिसंबर 2018 को जिला विधि सेवा प्राधिकरण के तहत लेट्स टॉक की पहल शुरू की गई। यहां पारिवारिक विवाद में दोनों पक्षों को परामर्श प्रदान किया जाता है। 

काउंसलर डॉ. मनीषा कोठेवार के अनुसार लगभग साठ फीसदी मामलों में दोनों पक्षों में समझौता हो जाता है। सेंटर में बुधवार और गुरुवार को काउंसलर पक्षों से बातचीत करते हैं। यहां परामर्श के लिए मामलों को जिला विधि सेवा प्राधिकरण से, भरोसा सेल से और कई बार वकील की ओर से भी प्रेषित किया जाता है। फिलहाल यह सेंटर नागपुर, मुंबई और पुणे में काम कर रहा है और जल्द ही नाशिक में शुरू किया जाने वाला है। 

4 हजार केस दर्ज, 13 सौ हुए अलग
पिछले वर्ष अक्टूबर में आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी के अनुसार, जनवरी 2014 से 2018 जुलाई तक नागपुर फैमली कोर्ट में चार हजार तलाक के मामले दर्ज थे, जिनमें से 1300 जोड़ा अलग हो चुका है। इस हिसाब से प्रतिदिन तीन जोड़े अलग हो रहे हैं। इस समयावधि में फैमिली कोर्ट में दर्ज किए गए 17620 केसों में से 5859 केस तलाक के हैं। हालांकि इनमें से 1113 मामलों को मध्यस्थता कर तलाक से बचा लिया गया।