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कश्मीरी छात्रों के लिए दोबारा पीएचडी की प्रवेश परीक्षा कराएगी बीयू 

कश्मीरी छात्रों के लिए दोबारा पीएचडी की प्रवेश परीक्षा कराएगी बीयू 

हाईलाइट

  • आर्टिकल-370 हटाए जाने के कारण स्टूडेंट्स लौट गए थे जम्मू-कश्मीर
  • बच्चों का साल खराब न हो इसलिए दोबारा कराई जा रही प्रवेश परीक्षा
  • छात्रों के पुराने फार्म की ही फीस मान्य होगी  

डिजिटल डेस्क, भोपाल। कश्मीरी छात्रों के लिए बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) में दोबारा से पीएचडी की प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिए हैं। ज्ञात हो कि कश्मीरी छात्र राज्य से आर्टिकल-370 खत्म होने के कारण प्रवेश परीक्षा में नहीं बैठ पाए थे। हर साल बीयू में करीब 60 कश्मीरी छात्र पीएचडी करने आते हैं, लेकिन इस साल एक भी छात्र नहीं आया।

बीयू के वाइस चांसलर प्रो. आरजे राव ने बताया कि यूनिवर्सिटी नहीं चाहता है कि किसी भी बच्चे का साल खराब हो, इसलिए वह दोबार प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय किया है। इसके लिए किसी भी छात्र को कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं देना होगा। छात्रों के पुराने फार्म की ही फीस मान्य होगी। इस परीक्षा में वही छात्र भाग ले सकेगा जो पिछली बार फार्म भरने के बाद परीक्षा से वंचित रह गया था।

दरअसल कश्मीर से केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को आर्टिकल-370 खत्म कर वहां, धारा 144 लागू कर दी थी। इस कारण वहां फोन और इंटरनेट की सेवा बंद कर दी थी। जबकि बीयू ने 6 अगस्त को पीएचडी के लिए प्रवेश परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। इसकी जानकारी कश्मीर के छात्रों को समय पर न मिलने के कारण वे प्रवेश परीक्षा से वंचित रह गए थे। कुछ कश्मीरी छात्र जो यहां पढ़ते हैं, उन्होंने तो फार्म भरा, लेकिन वह 370 लगने की वजह से वह अपने परिवार के वापस लौट गए और परीक्षा से वंचित रह गए।

बीयू के एक अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय 1700 पीएचडी सीट पर प्रवेश परीक्षा करा चुका है। बीयू प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि जिन छात्रों की प्रवेश परीक्षा छूट गई है, उनका एक साल खराब न हो इसके लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बीते सोमवार को निर्णय लिया कि उन छात्रों को परीक्षा में बैठने का एक ओर मौका दिया जाएगा।

आर्टिकल-370 हटाए जाने के कारण स्टूडेंट्स लौट गए थे जम्मू-कश्मीर
बच्चों का साल खराब न हो इसलिए दोबारा कराई जा रही प्रवेश परीक्षा
छात्रों के पुराने फार्म की ही फीस मान्य होगी  

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।