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सीधी की 50 मौतों का जिम्मेदार कौन?, जिस मार्ग से बस को जाना था वहां कई दिनों से जाम लग रहा था, ड्राइवर गिरफ्तार

सीधी की 50 मौतों का जिम्मेदार कौन?, जिस मार्ग से बस को जाना था वहां कई दिनों से जाम लग रहा था, ड्राइवर गिरफ्तार

भोपाल/सीधी  (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में नहर के पानी में बस के समा जाने से 50 लोगों की अकाल मौत के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इन मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है। ऐसा इसलिए क्योंकि बस को जिस मार्ग से जाना था वहां कई दिनों से जाम लग रहा था। नतीजतन बस को नहर वाले मार्ग से ले जाया गया और हादसा हो गया। सरकार क्या दोषियों पर जल्दी कार्रवाई करने का साहस दिखा पाएगी या फिर महज रस्म अदायगी ही होकर रह जाएगी? सतना के एसपी धरमवीर सिंह यादव ने कहा कि पुलिस ने बस ड्राइवर को सतना से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे सीधी लाया गया। 

सीधी से सतना जा रही बस मंगलवार को बाणसागर की नहर में समा गई थी, इस बस में अधिकांश यात्री वे थे जो नौकरी पाने के लिए परीक्षा देने जा रहे थे। वे परीक्षा दे तो नहीं पाए मगर जिंदगी की बाजी जरूर हार गए, अब तक 50 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर बस सरदा पाटन गांव वाले रास्ते से होकर क्यों जा रही थी, तो पता चला है कि इस बस को छुहिया घाटी से होकर जाना था और यह बस इसी मार्ग से जाती भी है परंतु बीते तीन-चार दिनों से इस मार्ग पर लगातार जाम रहने के कारण बस को नहर वाले मार्ग से ले जाया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि मंगलवार को एक परीक्षा थी और बस में परीक्षार्थी भी सवार थे।

सीधी से सतना की ओर जाने वाले मार्ग के छुहिया घाटी सड़क की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वे उस सड़क की हालत की कहानी खुद बयां कर रही है। गड्ढे हैं और उन पर वाहन सहज तरीके से चल नहीं पाते। यही कारण है कि इस मार्ग पर आए दिन जाम लगता रहता है और बीते कुछ दिनों से भी यही हो रहा है। क्या वाकई में सड़क मरम्मत की कोई योजना नहीं बनाई गई और अगर योजना थी और सरकार ने राशि मंजूर की थी तो सड़क की मरम्मत क्यों नहीं हुई। सड़क निर्माण का ठेका किसके पास है। सड़क पर जाम लगता है तो परिवहन विभाग और पुलिस महकमा तथा निर्माण विभाग और एजेंसी क्या कर रही है। वाहन दूसरे मार्गों से क्यों जा रहे है। ये बड़े सवाल है।

स्थानीय लोग तो कहते हैं कि सड़क की जर्जर हालत की वजह रेत आदि का परिवहन में लगे सैकड़ों वाहन हैं जो इस मार्ग से गुजरते हैं और उन्हें सरकारी मशीनरी के साथ राजनेताओं का संरक्षण हासिल है। राज्य के परिवहन मेत्री गोविंद सिंह राजपूत की हादसे के दिन ही एक भोज में शामिल होने की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के महासचिव के.के. मिश्रा ने इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा है, सीधी बस दुर्घटना.. प्रशासन गिन रहा लाशें, सीएम संवेदनाओं के नाम हो रहे हैं राजनैतिक रूप से भावुक! जिम्मेदार परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत अपने सहयोगी मंत्री के घर भोजन का लुत्फ उठाकर लगा रहे हैं ठहाके!! बेशर्मी की इंतहा?? सीएम साहब कुछ कहेंगे?

परिवहन मंत्री राजपूत का कहना है कि बस का परमिट निरस्त कर दिया गया है, जांच होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रथम ²ष्टया बस चालक की गलती प्रतीत होती है। एक अन्य मंत्री के निवास पर सहभोज में शामिल होने पर राजपूत का कहना है कि, वहां मेरे अलावा कई और मंत्री भी गए थे। कांग्रेस हादसे के बहाने राजनीति करती है, इसकी मै निंदा करता हूॅ।

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ का कहना है कि, मध्य प्रदेश में परिवहन माफिया सक्रिय है। प्रदेश के राजमार्गों पर, सड़कों पर, अनफिट, बगैर फिटनेस, बगैर परमिट, बगैर बीमे के, क्षमता से अधिक यात्रियों को पशुओं की भांति ठूंस-ठूंस बगैर स्पीड गवर्नर के, सैकड़ों बसें दुर्घटनाओं को खुला न्यौता देते हुए तेज गति से सरपट दौड़ रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि, इन इन बसों में न तो यात्रियों के सुरक्षा के साधन हैं, न ही ये सभी निर्धारित नियमों का पालन कर रही हैं। न इनकी नियमित चेकिंग होती है, न इनसे नियमों का पालन करवाया जाता है, एक हादसे के बाद हम जागते हैं और बाद में वही हाल, इसी कारण सीधी जैसे हादसे सामने आते है। आवश्यकता है इन बेलगाम परिवहन माफियाओं पर कड़ी कार्यवाही हो, इन्हें नियमों के अंतर्गत लाया जाए, तभी हम सीधी जैसी दुर्घटनाओं व हादसों पर अंकुश लगा सकते हैं।

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।