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CCI कपास खरीदी जारी रखेगी, आनलाइन होगा भुगतान

CCI कपास खरीदी जारी रखेगी, आनलाइन होगा भुगतान

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विदर्भ के किसानों से पर्याप्त कपास नहीं खरीदने के आरोपों को कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने खारिज किया है। उसने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सफाई दी है कि उन्होंने इस वर्ष महाराष्ट्र के किसानों से इतना अधिक कपास खरीदा है, जितना इतिहास में कभी नहीं खरीदा गया। सीसीआई ने यह भी बताया कि सितंबर तक कपास खरीदी जारी रखेंगे और सभी किसानों के खातों में ऑनलाइन भुगतान करेंगे। 

214 खरीदी प्वाइंट बनाए गए
शपथपत्र में सीसीआई ने दावा किया है कि  लॉकडाउन के पूर्व 26 मार्च तक प्रदेश के किसानों से कुल 1 करोड़ 45 लाख 96 हजार 166.04 क्विंटल कपास खरीदा गया। फिर 27 मार्च से 10 जून तक की लॉकडाउन अवधि में 40 लाख 60 हजार 750 क्विंटल यानी कुल 1 करोड़ 89 लाख 56 हजार 916.16 क्विंटल कपास खरीदा गया है।  कपास खरीदी के लिए सीसीआई ने शुरुआत में 83 खरीदी केंद्र और 214 खरीदी पाइंट स्थापित किए थे। इसके अलावा महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव कॉटन ग्रोअर मार्केटिंग फेडरेशन को बतौर सब-एजेंट नियुक्त किया गया। उन्होंने भी कपास खरीदी के लिए 74 खरीदी केंद्र और 140 खरीदी प्वाइंट स्थापित किए। इसके बाद जरूरत देखते हुए खरीदी केंद्र और प्वाइंट की संख्या बढ़ाई गई। इस मामले में हाईकोर्ट मंे दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

यह है मामला
नागपुर खंडपीठ में वर्षा निमकर, नितीन राठी  व अन्य  ने याचिका दायर कर कपास किसानों की समस्या उठाई है। याचिका के अनुसार विदर्भ सहित राज्य भर में इस बार पर्याप्त मात्रा में कपास उत्पादन हुआ है। लॉकडाउन में कपास खरीदी की प्रक्रिया गड़बड़ा गई है। कपास नहीं बिकने से किसान परेशानी में हैं। किसानों का कपास बिके, उसका योग्य मूल्य उन्हें मिले, इसके लिए चंद्रपुर जिले में कई बार आंदोलन हुआ। मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन सरकार और प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा अधिकृत कपास खरीदी केंद्र संचालक मनमानी कर रहे हैं। वे पर्याप्त मात्रा में कपास नहीं खरीद रहे हैं। ऐसे में अधिक से अधिक मात्रा में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास खरीदने के आदेश जारी करने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की गई है। निमकर की ओर से एड. अनिल धवस, राठी की ओर से एड. श्रीरंग भंडारकर, सीसीआई की ओर से एड. समीर सोहनी और केंद्र की ओर से एएसजीआई उल्हास औरंगाबादकर ने पक्ष रखा। 


 

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