comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

छिंदवाड़ा: ठेकेदार बनकर पहुंची फारेस्ट की टीम, पेंगोलीन के शिकारियों को दबोचा- दो गिरफ्तार

July 12th, 2020 14:35 IST
छिंदवाड़ा: ठेकेदार बनकर पहुंची फारेस्ट की टीम, पेंगोलीन के शिकारियों को दबोचा- दो गिरफ्तार

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा। वन विभाग की टीम ने वन्य प्राणी पेंगोलीन के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि एक आरोपी पकड़ से बाहर है। छिंदवाड़ा के वार्ड क्रमांक 18 कुंडीपुरा थाना अंतर्गत राजेन्द्र नगर में निवास करने वाले आरोपियों के पास से मृत पेंगोलीन, चार पंजे और प्रयुक्त किया गया बका जब्त किया गया है। 

वन विभाग की टीम ने आरोपियों को पकडऩे के लिए जाल बिछाया, जहां वन विभाग के कर्मचारी ठेकेदार बनकर इनके पास पहुंचे थे। वन अधिकारियों के अनुसार एक दिन पूर्व आरोपियों के पास ठेकेदार बनकर पहुंचे वन कर्मचारियों ने आरोपियों से निर्माण कार्य में मजदूरी करने के लिए कहा था। यहां पर आरोपियों ने काम करने की इच्छा जताई और अगले दिन बताने के लिए कहा।

इस बीच वन विभाग की टीम ने साक्ष्य जुटाते हुए इन आरोपियों की शिनाख्त कर शनिवार को इन्हें गिरफ्तार कर लिया। जहां आरोपी संतोष पिता होरीलाल वंशकार २९ वर्ष, शिवा पिता अशोक वाघमारे ३० वर्ष और दीपक पिता फूलवर मरकाम २२ वर्ष की पहचान हुई है।  यहां आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि आने वाले दिनों में पेंगोलीन के पंजों से तंत्र साधना में इसका उपयोग करने वाले थे। आरोपियों को पकडऩे में वन विभाग की टीम में वनपरिक्षेत्र अधिकारी एएसएस राजपूत, परिक्षेत्र सहायक सारना एनपी तिवारी, वनरक्षक अरुण सेंगर, वनरक्षक कपरवाड़ी रवि वर्मा, बीट सहायक मृणाल ठाकरे, वनरक्षक हरीश नागवंशी की भूमिका रही।

वायरल वीडियो से पहचान
पेंगोलीन के साथ आरोपी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके आधार पर वन विभाग ने आरोपियों की पहचान की। वनपरिक्षेत्र अधिकारी एसएस राजपूत ने बताया कि एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें आरोपी के हाथ में पहने हुए कड़े के जरिए पहचान हुई। यहां ठेकेदार बनकर पहुंचे वन विभाग की टीम ने पूछताछ के दौरान आरोपी की पहचान की है। श्री राजपूत ने बताया कि दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक फरार है जिसकी तलाश जारी है। इसके बाद और भी कई सुराग मिलने की संभावना है।

दो हिस्सों में पेंगोलीन
वनविभाग की टीम ने पेंगोलीन को दो हिस्सों में जब्त किया। यहां पर पेेंगोलीन के चार पंजे आरोपियों के पास जब्त मिले थे, वहीं मृत शरीर को आरोपी ने गड्ढे में छुपाकर रखा था।

कमेंट करें
g1mzp
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।