दैनिक भास्कर हिंदी: समृद्धि एक्सप्रेस वे  50 दिन से शांत, बाधाएं दूर होने के बावजूद उद्घाटन की जोह रहे बाट

August 20th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर करीब 50 दिन से कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही है। जमीन अधिग्रहण की अधिकांश बाधाएं दूर होने के बाद भी सरकार इस प्रोजेक्ट के उद्घाटन को लेकर शांत बैठी है। राज्य में जारी आंदोलनों के कारण सरकार इस प्रोजेक्ट पर धीरे-धीरे काम कर रही है। 

सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट 
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) को कंपनियों द्वारा पेश किए गए मूल्यांकनों की समीक्षा करने के अलावा इन कंपनियों को कार्यारंभ का आदेश देना है। जून व जुलाई में इस पर कोई काम नहीं हुआ। अगस्त का आधा महीना भी निकल गया। इसके अलावा प्रोजेक्ट के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय भी लेना है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमआे) से अभी तक  इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमआे) को पत्र नहीं भेजा गया। 46 हजार करोड़ की लागत का यह राज्य का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को दी जानेवाली मुआवजा राशि शामिल नहीं है। 

नागपुर से मुंबई तक का फासला 701 किमी
समृद्धि एक्सप्रेस-वे का नागपुर से मंुबई तक का फासला 701 किमी है। किसानों, राजनेताआें के विरोध के बावजूद सरकार इस प्रोजेक्ट पर कायम रही। जमीन अधिग्रहण की अधिकांश बाधाएं दूर की गईं। अब तक 92 फीसदी जमीन अधिग्रहित की गई है। सरकार बाजार मूल्य के हिसाब से किसानों को मुआवजा दे रही है। कुल 16 चरणों में बनने वाले इस मार्ग के 13 चरणों के लिए 31 मई 2018 को टेंडर जारी किए गए थे। नागपुर में मेघा इंजीनियरिंग, वर्धा में एफकॉन्स, अमरावती में एनसीसी, वाशिम पूर्व में पीएनसी इन्फ्राटेक , वाशिम पश्चिम में सद्भाव इंजीनियर, बुलढाणा पूर्व में ऍप्को व बुलढाणा पश्चिम का काम रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को दिया गया है। 
 

इस कारण हुआ असर
पिछले दो महीने से राज्य में जगह-जगह मराठा समाज के आंदोलन हो रहे हैं। आंदोलन कई जगह हिंसक हुआ। आंदोलन में करोड़ों की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है। मराठा समाज के युवाआें ने आत्महत्या कर समाज की पीड़ा को व्यक्त किया है। सरकार इस उग्र आंदोलन के कारण प्रोजेक्ट पर समुचित ध्यान नहीं दे पा रही है। उद्घाटन की तिथि सरकार को तय करनी है। प्रधानमंत्री को लाने की जिम्मेदारी भी सीएमआे पर है। सरकारी स्तर पर प्रक्रिया ठंडी पड़ने से प्रशासन भी शांत बैठा है। एक महीने से ज्यादा समय से एमएसआरडीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने इस प्रोजेक्ट पर सीएम से चर्चा नहीं की। प्रशासनिक अधिकारी इस मुद्दे पर सीएम से बात करने को खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। मराठा आंदोलन का असर प्रोजेक्ट के उद्घटान पर हो रहा है। 
 

तीन फेस के लिए नहीं निकले टेंडर 
एमएसआरडीसी ने स्पष्ट किया था कि यह प्रोजेक्ट 16 फेस में बनेगा। 13 फेस के टेंडर जारी हुए आैर बचे हुए 3 फेस के टेंडर प्रगति पर होने का दावा किया था। दो महीने बीत गए। 3 फेस के लिए टेंडर जारी नहीं हो सके हैं। 

दस जिले व 26 तहसीलें जुडे़ंगी
समृद्धि एक्सप्रेस वे से राज्य के 10 जिले, 26 तहसीलें व 392 गांव जुडेंगे। इस प्रोजेक्ट से कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, परिवहन व लोक निर्माण के काम में तेजी आएगी। नागपुर से मुंबई की दूरी कम होने के साथ ही फासला भी कम होगा। 
 

कंपनियों को नहीं मिले आदेश
जिन 13 कंपनियों को टेंडर जारी हुए हैं, उन्हें अब तक कार्यारंभ आदेश नहीं दिए गए। बचे हुए 3 फेस के लिए भी टेंडर जारी नहीं हो सके हैं। उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री को लाने की तैयारी है, लेकिन उद्घाटन की तारीख अभी तय नहीं हुई है। प्रधानमंत्री को लाने के संबंध में सीएमआे पीएमआे से संपर्क करेगा। राज्य में मराठा व अन्य सामाजिक आंदोलनों को देखते हुए काम की गति कम हुई है। उद्घाटन की तिथि के बारे में एमएसआरडीसी की सीएमआे से चर्चा नहीं हो सकी। आंदोलन का असर काम की गति पर हुआ एेसा बोल सकते हैं।   (मुकुल डोहरा, जनसंपर्क अधिकारी एमएसआरडीसी मुंबई) 
 

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