comScore

मराठा संगठनों ने दी थी धमकी, सीएम फडणवीस नहीं जाएंगे पंढरपुर के विट्ठल मंदिर

July 23rd, 2018 15:12 IST
मराठा संगठनों ने दी थी धमकी, सीएम फडणवीस नहीं जाएंगे पंढरपुर के विट्ठल मंदिर

डिजिटल डेस्क, मुंबई। इस साल सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पत्नी अमृता फडणवीस के साथ अपने निवास पर ही विठ्ठल पूजा की। सीएम ने ट्विटर पर इसकी तस्वीरें और वीडियो भी पोस्ट किए हैं। दरअसल आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मराठा समाज के संगठनों की धमकी के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस आषाढ़ी एकादशी पर सोमवार मध्यरात को पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में शासकीय पूजा के लिए नहीं पहुंचे। महापूजा को लेकर इस समूह ने सीएम फडणवीस के दौरे को रोक लगाने कहा था। महाराष्ट्र में आज पवित्र पंढरपुर यात्रा का समापन हो रहा है. इस मौके पर करीब 12 लाख श्रद्धालु भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंचे हैं।

इससे पहले रविवार को पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने यह जानकारी दी कि वह पंढरपुर में विट्ठल मंदिर में दर्शन के लिए 10 लाख वारकरी (भक्तों) की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूजा में नहीं जाएंगे। सीएम फडणवीस ने कहा,  "महाराष्ट्र में पंढरपुर जाने वाले तीर्थयात्रियों की वारी परंपरा 700 साल पुरानी है। मैं पिछले 3 सालों से वहां जा रहा हूं। लेकिन कुछ समूह ने इसका विरोध करे रहे है, उनका पक्ष गलत है, अगर मैं 12 लाख तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा हूं, तो मैं वहां नहीं जाऊंगा।"


फडणवीस ने कहा कि मराठा समाज के कुछ संगठनों ने भूमिका ली है कि वह सीएम को विट्ठल मंदिर में पूजा नहीं करने देंगे। इन संगठनों ने मराठा आरक्षण का फैसला होने तक राज्य सरकार की तरफ से 72 हजार पदों पर की जाने वाली भर्ती को रोक लगाने की मांग की है। लेकिन उनकी यह भूमिका गलत है। क्योंकि सरकार ने साफ कहा है कि जितने पदों पर बहाली होगी उसमें से 16 प्रतिशत जगह मराठा समाज के लोग छोड़ दी जाएगी। मराठा आरक्षण के संबंध में सरकार की भूमिका स्पष्ट है। आरक्षण को लेकर सरकार ने राज्य पिछड़ा आयोग का गठन किया है। आरक्षण पर फैसला अदालत को करना है। 

सीएम ने कहा कि मुझे जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है। मुझे कोई हाथ नहीं लगा सकता है लेकिन यदि वारकरियों की जीवित हानि हुई तो महाराष्ट्र को कभी कोई माफ नहीं करेगा। सीएम ने कहा कि मुझे पर पत्थर फेंक कर यदि किसी को मराठा आरक्षण मिलता है तो मैं इसके लिए तैयार हूं। लेकिन आरक्षण अभी संभव नहीं है। आरक्षण पर फैसला अदालत को करना है।
 

फडणवीस ने कहा, पुलिस ने मैसज ट्रैप किया है। जिसमें वारकरियों में सांप छोड़ने और भगदड़ की स्थिति पैदा करने की बात कही गई है। इस तरह की योजना बनाना एकदम गलत है। प्रगतिशील महाराष्ट्र के लिए लज्जास्पद है। सीएम ने कहा कि वारकरियों को बंधक बना करके इस तरह की मांग करना उचित नहीं है। ऐसे लोग छत्रपति शिवाजी महाराज के सैनिक हो ही नहीं सकते हैं।

सीएम के फैसले का प्रदेश के जलसंसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने स्वागत किया है। महाजन ने कहा कि लाखों वारकरी यहां पर आए हुए हैं। इसलिए अप्रिय घटना को टालने के लिए सीएम ने सही कदम उठाया है।

गौरतलब है कि आषाढ़ी एकादशी के दिन पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में हर साल सीएम के हाथों शासकीय पूजा होती है। भगवान विट्ठल के सेवक के रूप में पूजा का मान सीएम को दिया जाता है। बीते कई सालों से यह परंपरा चली आ रही है। केवल 5 से 6 बार यह परंपरा खंडित हुई है।

कमेंट करें
TY5l4
NEXT STORY

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।