दैनिक भास्कर हिंदी: ऑपरेटर की कमी को पेंडेंसी की वजह सुनकर भडकीं कलेक्टर, कहा- अब कोई बहाने नहीं चलेंगे

July 29th, 2018

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। राजस्व प्रकरणों की समीक्षा के लिए शनिवार को आयोजित रेवेन्यू ऑफिसर्स (आरओ) बैठक में कलेक्टर छवि भारद्वाज उस वक्त भडक गई जब किसी अधिकारी ने ऑपरेटर की कमी से पेंडेंसी होने की वजह बता दी। उन्होंने सख्त लहजे में दो टूक जबाव दिया कि इधर-उधर के बहाने नहीं चलेंगे, बेहतर होगा कि काम पर ध्यान दिया जाए।

बैठक में कलेक्टर ने कुछ नए पहलुओं को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली का आंकलन किया। इसके तहत राजस्व कोर्ट में दर्ज कुल प्रकरणों की तुलना में कितने प्रतिशत का निराकरण किया गया है, इस विषय को लेकर समीक्षा की गई। इस दौरान कलेक्टर ने भू-अभिलेख अधीक्षक से उनके पास लंबे समय से बड़ी संख्या में लंबित पड़े प्रकरणों का कारण पूछा। जिसपर उन्होंने कहा कि अमले की कमी व उपकरण आदि नहीं होने के चलते काम तेज गति से नहीं हो पा रहा है।

कलेक्टर ने उनके जवाब से असंतुष्टि जताते हुए नाराजगी व्यक्त की और कहा कि इस प्रकार की बहानेबाजी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। काम करने के लिए गंभीरता जरुरी है। बैठक के दौरान कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों से कहा कि उन्हें एक वर्ष से अधिक समय से लंबित राजस्व प्रकरणों की पेंडेंसी हर हाल में कम करनी होगी। इसके लिए उन्हें ऐसे प्रकरणों की सप्ताह में दो दिन सुनवाई करनी होगी और पक्षकारों के बयान लेकर उनका निराकरण करना होगा। 

एक माह में निपटाए नजूल नवीनीकरण के मामले
कलेक्टर ने कहा कि नजूल नवीनीकरण की प्रक्रिया एक माह के भीतर पूरी कर लेने की हिदायत भी राजस्व अधिकारियों को दी है। उन्होंने शहरी क्षेत्र में नजूल नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश देते हुए अधिकारियों से कहा है कि वे प्रत्येक तीन दिन में आरआई और पटवारियों सेनजूल नवीनीकरण के प्राप्त आवेदनों और उनके निराकरण के लिए की गई कार्रवाई का ब्यौरा लें। श्रीमती भारद्वाज ने कहा कि नजूल नवीनीकरण की प्रक्रिया की हर सप्ताह समीक्षा की जाएगी। उन्होंने यह कहा कि यदि अभी भी नजूल नवीनीकरण के प्रकरण आरआई या पटवारी के बस्ते में बंद हैं तो उन्हें आरसीएमएस में दर्ज कर लिया जाए। बाद में यदि कोई शिकायत मिली तो संबंधित पर कार्रवाई होगी। 
सीमांकन में ढिलाई बरतने वालों को फटकार
कलेक्टर ने सीमांकन के लंबित प्रकरणों के प्रकरणों को प्राथमिकता से निराकृत करने पर ज्यादा जोर दिया। उन्होंने मझौली, पौंड़ा और चरगंवा में सीमांकन प्रकरणों के निराकरण में बरती जा रही ढिलाई पर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सीमांकन के प्रकरणों को आरसीएमएस में दर्ज नहीं करने, इन प्रकरणों को लंबित रखने या लेकर बैठ जाने की प्रवृत्ति, नायब तहसीलदारों एवं राजस्व निरीक्षकों पर भारी पड़ेगी। ऐसा करके वे खुद अपने खिलाफ कार्रवाई को आमंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने सशक्त तहसीलदार बनाये गये ऐसे सभी राजस्व निरीक्षकों को वापस राजस्व निरीक्षक बनाने के निर्देश बैठक में दिये जो सीमांकन के प्रकरणों के निराकरण में ढिलाई बरत रहे हैं। कलेक्टर ने कार्य से लगातार अनुपस्थित रहने पर बरेला के राजस्व निरीक्षक का निलंबन का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी बैठक में दिये।

कई की वेतन रोकने के निर्देश
कलेक्टर ने एक अप्रैल से 26 जुलाई के बीच सीएम हेल्पलाइन से राजस्व विभाग से संबंधित प्राप्त प्रकरणों की बड़ी संख्या में पेंडेंसी पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने ऐसे राजस्व अधिकारियों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी जो 30 प्रतिशत आवेदनों का निराकरण आवेदकों की संतुष्टि के साथ नहीं कर सके हैं। उन्होंने तहसीलदार जबलपुर, तहसीलदार गोरखपुर-दो, तहसीलदार मझौली, तहसीलदार सिहोरा और तहसीलदार शहपुरा के खराब परफार्मेंस पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए इनका वेतन रोकने का नोटिस जारी करने के निर्देश भी बैठक में दिए।