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स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ाया विविध पदों की प्रतियोगी परीक्षा का नियोजन

स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ाया विविध पदों की प्रतियोगी परीक्षा का नियोजन

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित विविध पदों की स्पर्धा परीक्षा का नियोजन बुरी तरह गड़बड़ा गया। शहर का रायसोनी कॉलेज भी परीक्षा का केंद्र था। यहां के परीक्षार्थियों की शिकायत है कि दोपहर के सत्र में उम्मीदवारों के हस्ताक्षर लिए बगैर प्रश्न-पत्र का लिफाफा खोल दिया गया। आपत्ति सुनने कोई तैयार नहीं था। विद्यार्थियों का आरोप है कि उन्हें जबरन बाहर निकाला गया और उनके साथ मारपीट की गई।

मनीषा डोंगरे, हरिदास श्रीरामे, अविनाश वानखेड़े समेत अन्य विद्यार्थियों ने नागपुर पुलिस आयुक्त से मामले की शिकायत की है। विद्यार्थियों के अनुसार जब वे परीक्षा केंद्र पर पहंुचे तो देखा कि कोई बैठक व्यवस्था ही नहीं है। जहां सीट मिली, वहीं बैठते गए। फिर स्टाफ खुले लिफाफे में पेपर लेकर आया, जबकि नियमानुसार परीक्षार्थियों के सामने सील खुलनी चाहिए। आपत्ति जताने पर स्टाफ बदतमीजी पर उतर आया। अनियमितता को देखते हुए इस केंद्र पर लिए गए पेपर रद्द करने की मांग की है। 

अनेक शिकायतें 
परीक्षा केंद्रों के अंदर और बाहर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ीं। पेपर लीक होने की शिकायतें देखने को मिलीं। 700 किमी से भी अधिक दूरी से  शहर पहुंचे परीक्षार्थियों को सख्त लॉकडाउन के कारण खाने-पीने के लाले पड़ गए। परीक्षार्थियों ने रविवार की हुई परीक्षा ही रद्द करने की मांग की है।  

ऐसे ली गई परीक्षा 
यह परीक्षा दो सत्रों में ऑफलाइन मोड में आयोजित की गई थी। राज्य सरकार ने महाआईटी नामक कंपनी को परीक्षा की जिम्मेदारी दी थी। इसमें स्वास्थ्य विभाग के मानसशास्त्र, भौतिकोपचार विशेषज्ञ, समुपदेशक, कनिष्ठ लिपिक, सामाजिक पर्यवेक्षक जैसे विविध पद शामिल थे। इस परीक्षा के लिए वर्ष 2019 में महापरीक्षा वेबसाइट पर आवेदन भरे गए थे। परीक्षा के आयोजन को देखते हुए कंपनी ठीक से परीक्षा नहीं ले पाई, ऐसा अभ्यर्थियों का आरोप है। 

परीक्षा केंद्र 700 किलोमीटर दूर 
विभाग द्वारा करीब 8500 पदों के लिए नागपुर समेत प्रदेश भर के विविध शहरों में परीक्षा आयोजित की गई थी। अहम बात यह कि परीक्षा केंद्र के आवंटन में भी गड़बड़ी हुई। विदर्भ के परीक्षार्थियों को पुणे, मुंबई, जलगांव में परीक्षा केंद्र दिए गए। वहीं उस क्षेत्र के परीक्षार्थियों को नागपुर और चंद्रपुर में परीक्षा केंद्र दिया गया। ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए 700 किमी से अधिक की यात्रा करनी पड़ी। 
 

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