दैनिक भास्कर हिंदी: EVM और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में लापरवाही की SIT जांच कराने हाईकोर्ट पहुंंची कांग्रेस

December 6th, 2018

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। विधानसभा चुनाव में EVM और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में लापरवाही की SIT जांच कराने की मांग को लेकर कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में EVM और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने और सागर, भोपाल, सतना, शाजापुर में रिजर्व EVM की फॉरेसिंक जांच कराने की मांग की गई है। याचिका की सुनवाई 6 दिसंबर को नियत की गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव नरेश सराफ की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि सागर के खुरई में मतदान समाप्ति के 48 घंटे बाद EVM मशीन स्ट्रांग रूम में पहुंची। सतना के स्ट्रांग रूम के पिछले दरवाजे से दो संदिग्ग्ध लोग अंदर घुसते हुए सीसीटीवी में देखे गए है।

भोपाल में स्ट्रांग रूम के भीतर छेड़छाड़ कर प्रसारण को प्रभावित किया गया, जिसमें लाइव रिकार्डिंग दिखाने की बजाय सेव वीडियो प्रस्तुत किया गया। जिससे स्पष्ट पता चलता है कि स्ट्रांग रूम में कतिपय लोगों द्वारा छेड़छाड़ के दौरान लाइव रिकार्डिंग को रोककर डिस्प्ले में पहले से तैयार किए गए वीडियो का प्रसारण किया गया। याचिका में कहा गया है कि शाजापुर के शुजालपुर विधानसभा में दो अधिकारी EVM लेकर भाजपा नेता के होटल में रूके थे। वहां पर दोनों अधिकारियों ने शराब भी पी थी। खंडवा में तीन EVM और वीवीपैट मशीन मतदान के तीन दिन बाद स्ट्रांग रूम में पहुंची।

याचिका में कहा गया कि इन घटनाओं की शिकायत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने मुख्य चुनाव आयुक्त से की थी। याचिका में इन सभी घटनाओं की SIT जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने की मांग की गई है। याचिका में रिजर्व केटेगरी में शामिल अनुपयोगी EVM की संख्या और सिरियल नंबर वेबसाइट में अपलोड करने की मांग की गई है। याचिका की सुनवाई 6 दिसंबर को नियत की गई है।

EVM की गणना का मिलान वीवीपैट की पर्चियों से कराने याचिका
मप्र हाईकोर्ट में EVM की मतगणना का मिलान वीवीपैट की पर्चियों से कराने के लिए जनहित याचिका दायर की गई है। जनहित याचिका में केन्द्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य के मुख्य चुनाव पदाधिकारी को पक्षकार बनाया गया है। याचिका की सुनवाई दो दिन के भीतर होने की संभावना है।  तिलहरी निवासी अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन्हें आशंका है कि EVM के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग का दावा है कि किसी भी वायरलैस डिवाइस से EVM को कनेक्ट नहीं किया जा सकता है।

वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने EVM मैन्यूअल के चेप्टर 19 में कहा है कि एक EVM ट्रेकिंग के लिए मोबाइल एप्लीकेशन बनाया गया है, उस सॉफ्टवेयर के जरिए सेंट्रल इलेक्शन ऑफिसर, जिला निर्वाचन अधिकारी और वेयर हाउस इंचार्ज EVM से कनेक्ट हो सकते है। ऐसी स्थिति में EVM की मतगणना शंकास्पद हो जाती है। याचिका में सागर खुरई और खंडवा में EVM विलंब से पहुंचने, सतना में मतगणना केन्द्र में संदिग्ग्धों के घुसने और भोपाल में मतगणना केन्द्र की बिजली गुल होने का भी हवाला दिया गया है। इसके आधार पर EVM की गणना का मिलान वीवीपैट पर्चियों से कराने का निर्देश जारी करने का अनुरोध हाईकोर्ट से किया गया है।

 

खबरें और भी हैं...