दैनिक भास्कर हिंदी: केन्द्र की वैक्सीनेशन नीति पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, चिदंबरम की मांग- वन नेशन वन प्राइस

April 23rd, 2021

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में कोरोनावायरस संक्रमण के बीच वैक्सीनेशन को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को वैक्सीन नीति की आलोचना की और राज्यों से कहा कि वे वैक्सीनों की कीमत पर बातचीत करने के लिए समितियों का गठन करें।

उन्होंने कहा, टीकों के लिए कई मूल्यों की अनुमति देने का केंद्र सरकार का फैसला भेदभावपूर्ण और प्रतिगामी है। राज्यों को सर्वसम्मति से इस फैसले को खारिज करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकारों के लिए सबसे अच्छा तरीका संयुक्त रूप से एक मूल्य वार्ता समिति बनाना है और दो वैक्सीन निमार्ताओं के साथ एक समान मूल्य पर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने वन नेशन वन प्राइस  की मांग करते हुए कहा कि अलग-अलग कीमतों की वजह से सीमित संसाधन वाले राज्यों को काफी नुकसान हो सकता है। इससे राज्य सरकारों पर और अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। राज्यों को पहले ही जीएसटी कलेक्शन नहीं मिला है, राज्यों की कर्जदारी बढ़ गई है, जिससे उन्हें और नुकसान हो सकता है। 

राज्य सरकारों की संयुक्त क्रय शक्ति निमार्ताओं को एक समान मूल्य के लिए सहमत होने के लिए मजबूर करना चाहिए। इसके लिए राज्यों को पहल करनी चाहिए। केंद्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारी को छोड़ दिया है और कॉपोर्रेट मुनाफाखोरी के लिए आत्मसमर्पण कर दिया है। गुरुवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकार ने अतीत से कोई सबक नहीं सीखा है और उनकी वैक्सीन नीति मनमानी और भेदभावपूर्ण है। प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में, सोनिया गांधी ने कहा, यह अजीब बात है कि पिछले साल के कठोर सबक और नागरिकों की परेशानियों के बावजूद भी सरकार एक मनमानी और भेदभावपूर्ण नीति का पालन कर रही है जो मौजूदा चुनौतियों के लिए और खराब बना रही है।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष ने कहा कि सरकार नीति के अनुसार उन्होंने सभी को मुफ्त टीकाकरण मुहैया कराने की अपनी जिम्मेदारी त्याग दी है। उन्होंने पूछा कि सरकार देश में वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों द्वारा मुनाफाखोरी की अनुमति क्यों दे रही है। कांग्रेस ने मांग की है, आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी के लिए मुफ्त टीकाकरण होना चाहिए और नीति को बदल देना चाहिए क्योंकि वैक्सीन की कीमत एक समान होनी चाहिए।

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