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कोरोना से बचाव: डेंटल में रबर डैम तकनीक का उपयोग, बढ़ सकता है खर्च

कोरोना से बचाव: डेंटल में रबर डैम तकनीक का उपयोग, बढ़ सकता है खर्च

डिजिटल डे्स्क, नागपुर। लॉकडाउन में डॉक्टर्स और अस्पताल दिन-रात सेवा में लगे हुए हैं। इसमें डेंटल क्षेत्र भी हाई रिस्क में आता है। नागपुर के डेंटल एसोसिएशन ने इस समय किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए, इस विषय पर योजना तैयार की है। इसमें रबर डैम तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, इससे संक्रमण का खतरा सामान्य तकनीक से कई गुना कम हाे जाता है। 

पीपीई किट पहनना जरूरी 
इंडियन डेंटल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. तुषार श्रीराव ने बताया कि सभी डेंटल डॉक्टर के सामने कोरोना के चलते इलाज करने में परेशानी और झिझक है। मरीज के सीधे मुंह से संपर्क करने का मतलब है कि थोड़ी सी गलती और संक्रमित हो जाना। इसलिए डेंटल रबर डैम तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जिस तरह किसी भी सामान्य ऑपरेशन में मरीज को गाउन पहनाया जाता है, और जहां ऑपरेशन करना है सिर्फ वही भाग खुला होता है, उसी तरह रबर डैम तकनीक में भी होता है। अगर 2 या 3 दांतों की जांच करना है, तो सिर्फ वही दांत दिखेंगे। रबर डैम से सलाइवा और अन्य जगह पर संपर्क नहीं होता। इसके साथ ही मास्क और शील्ड का उपयोग कर रहे हैं। पूरी पीपीई किट पहन कर काम करना पड़ रहा है। 

महंगा हो सकता है डेंटल खर्च
डॉ. श्रीराव ने बताया कि पहले एक मरीज की जांच एक डॉक्टर करता था। अब एक मरीज की जांच के लिए 3 लोग लगते हैं। एक डॉक्टर सिर्फ एक काम करेगा। पीपीई किट पहनने से काम करना मुश्किल हो जाता है। कोरोना अचानक खत्म होने वाला नहीं है। स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में बहुत समय लगेगा, भविष्य में डेंटल इलाज के लिए डॉक्टर्स को भी खर्च ज्यादा करना पड़ेगा। हमने हाल ही में ऑनलाइन पैनल चर्चा भी की है।
 

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