दैनिक भास्कर हिंदी: NMC कर्मचारी बैंक पद भर्ती में भारी फर्जीवाड़ा, रिश्तेदारों का रहा बोलबाला

September 27th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। NMC ( नागपुर महानगर पालिका)  कर्मचारी सहकारी बैंक लि. नागपुर की पद भर्ती में भारी फर्जीवाड़ा  सामने आया है। भर्ती  में रिश्तेदारों का बोलबाला रहने की शिकायतें भी मिली है। बता दें कि पद भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया का पालन किया गया, लेकिन खुलेआम नियमों का उल्लंघन हुआ। संचालक मंडल ने नई भर्ती के नाम पर अपने रिश्तेदारों को नियुक्त कर दिया है। किसी ने अपनी बहू, किसी ने बेटे, किसी ने साले को, तो किसी ने दूर के रिश्तेदारों को नियुक्ति दी है। मामला सामने आने के बाद बैंक के संचालक मंडल की बैठक में सदस्यों ने सवाल पूछे, तो संचालक मंडल ने आनन-फानन में बिना जवाब दिए बैठक ही खत्म कर दी। अब यह मामला कोर्ट में पहुंच गया है। ऐसे में संचालक मंडल कोर्ट में मामला प्रलंबित बताकर जवाब देने से बच रहा है।

1960 परीक्षार्थियों ने दी थी परीक्षा
वर्षों पहले दि नागपुर महानगर पालिका कर्मचारी सहकारी बैंक लि. की स्थापना की गई थी। इसमें 21 संचालक और 5000 से अधिक सदस्य हैं। समय-समय पर इसके चुनाव होते रहते हैं। पिछले वर्ष की संचालक मंडल के चुनाव हुए, जिसके बाद रिक्त पदों को देखते हुए इस साल नई पद भर्ती शुरू की गई। बैंक में 29 पदों की भर्ती के लिए 9 फरवरी 2018 को विज्ञापन जारी किया गया। इसके बाद 18 फरवरी को ऑनलाइन शुद्धिपत्रक जारी हुआ। विवादों में चल रही महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी प्रा. लि. अमरावती को ऑनलाइन पद भर्ती का काम दिया गया। 29 पदों के लिए करीब 1960 परीक्षार्थियों ने ऑनलाइन परीक्षा दी। इनमें से 29 लोगों का चयन किया गया। इन 29 में से 22 ऐसे हैं, जो 21 संचालकों में से किसी न किसी के रिश्तेदार हैं। जब नियुक्त लोगों की सूची सार्वजनिक की गई, तो इसे देख सभी दंग रह गए। कोई बेटा, बेटी है, कोई बहू है, तो कोई साला है। किसी ने अपने कोटे से किसी और को नियुक्त किया। जब बवाल मचा, तो संचालक मंडल ने इसे दबाने का प्रयास किया। हाल में संचालक मंडल की बैठक हुई, तो बैंक यूनियन और सदस्यों ने यह मामाल उठाया। उसके बाद बैठक को ही समाप्त कर दिया गया। बैंक के कुछ सदस्य यह मामला हाईकोर्ट लेकर पहुंच गए हैं।

पग-पग पर होता रहा उल्लंघन
पद भर्ती के लिए अनेक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया। हर मामले में यह संदेह के घेरे में है। बताया गया कि सहकारी क्षेत्र अंतर्गत होने से पद भर्ती करते समय जिला उपनिबंधक की अनुमति लेना अनिवार्य था। समाज कल्याण विभाग से रोस्टर भी मंजूर नहीं किया गया। पात्र उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक किए बिना पदभर्ती की गई। शैक्षणिक योग्यता का भी पालन नहीं किया गया। ऐसे अनेक नियम और प्रक्रियाएं थीं, जिसका पालन नहीं होने का आरोप है।

संचालक मंडल पर हो कार्रवाई
संचालक मंडल ने पद भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है। सभी संचालकों का कोई न कोई रिश्तेदार नियुक्त किया गया है। ऑनलाइन परीक्षा में ही गड़बड़ी की गई। जिस कंपनी को पद भर्ती का ठेका दिया गया था, वह विवादित है। सभी नियुक्तियों को रद्द कर नए सिरे से पद भर्ती की जाए और संचालक मंडल पर भी कार्रवाई हो।
(वीर सिंह जाधव, पूर्व उपाध्यक्ष और विजय बागल, पूर्व संचालक)

ऑनलाइन प्रक्रिया से हुई भर्ती
पद भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। इससे जो नतीजे आए हैं, उसके हिसाब से ही नियुक्तियां की गईं। फिलहाल कोर्ट में मामला विचाराधीन है। इसलिए ज्यादा बताना उचित नहीं है।
(विजय काथवटे, अध्यक्ष, मनपा कर्मचारी सहकारी बैंक)