दैनिक भास्कर हिंदी: कोरोना को लेकर सीसीआर व गाइड लाइन पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

May 6th, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नागपुर महानगरपालिका और जिला प्रशासन द्वारा कोरोना के इलाज के लिए सेंट्रल कंट्रोल रूम (सीसीआर) की स्थापना करते हुए विविध प्रकार की गाइडलाइन जारी की गई है। इसमें मरीज को सिर्फ सीसीआर की सलाह के बाद भर्ती करने के आदेश अस्पताल को दिए गए है। वहीं, गाइडलाइन उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अस्पताल या चिकित्सक पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। 

मांगा जवाब
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने प्रशासन को उनकी गाइडलाइन में कई जगहों पर (बेड अधिग्रहण, बिल भुगतान, बेड-इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी) अधिक स्पष्टता लाने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने यह मुद्दा उठाया है कि सीसीआर द्वारा भर्ती किया गया मरीज यदि अस्पताल का खर्च उठाने में सक्षम न हो, तो फिर अस्पताल को भुगतान कैसे होगा? क्या मनपा या राज्य सरकार अपने कोविड फंड से भुगतान करके बाद में मरीज से रकम वसूलेगी? इस मुद्दे पर मनपा आयुक्त और जिलाधिकारी से जवाब मांगा गया है।

जरूरत पड़ने पर रेमडेसिविर का कोटा बढ़ाएगा केंद्र
1 से 9 मई के बीच महाराष्ट्र के लिए कम रेमडेसिविर का कोटा तय करने पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। केंद्र ने कहा है कि उन्होंने मौजूदा कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए ही राज्यों के लिए कोटा तय किया है। महाराष्ट्र में यदि और अधिक रेमडेसिविर की जरुरत पड़ेगी, तो केंद्र निश्चित तौर पर कोटा बढ़ाएगा। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 मई को रखी है। मामले में एड.श्रीरंग भंडारकर न्यायालयीन मित्र हैं। मध्यस्थी अर्जदारों की ओर से एड.एम.अनिल कुमार, एड.तुषार मंडलेकर व अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की।

शिकायत भी सुनेगी कमेटी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गाइडलाइन के उल्लंघन पर अस्पताल या चिकित्सक पर आपराधिक मुकदमे का प्रावधान रखा गया है। प्रशासन सीधे अस्पताल या चिकित्सक पर आपराधिक मामला दर्ज न करें, बल्कि ग्रीवियंस कमेटी की सलाह के बाद ही ऐसा कोई कदम उठाएं। हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्या.एम.एन.गिलानी की अध्यक्षता में ग्रीवियंस कमेट गठित की है। इसमें सेवानिवृत्त न्या.एम.जी.गिरटकर और डॉ.पातुरकर को सदस्य तथा एसडीओ शेखर गाडके को सचिव बनाया गया है। अस्पताल के बिल के संबंध में शिकायत पर सुनवाई के अधिकार भी कमेटी को दिए गए हैं।