दैनिक भास्कर हिंदी: कोर्ट में जवाब पेश न करने वाले आईएएस अफसर पर दस हजार का जुर्माना

December 14th, 2018

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी हाईकोर्ट में जवाब पेश न करना एक आईएएस अफसर को खासा मंहगा पड़ गया । कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दस हजार रूपये जुर्माना ठोका है । इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव पर 10 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई गई है । पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी जवाब पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट ने आदिवासी कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अशोक शाह पर 10 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई है। जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकल पीठ ने कॉस्ट की राशि अगली सुनवाई के पहले याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को दिए जाने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 22 जनवरी को नियत की गई है

याचिकाकर्ता  को नहीं दी नियुक्ति
गोटेगांव निवासी कृष्णा बाई मुडिया की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वर्ष 1993 में उसकी नियुक्ति सहायक अध्यापक के पद पर गोटेगांव में हुई थी। उसे नियुक्ति-पत्र भी जारी कर दिया गया। इसी दौरान किसी ने शिकायत कर दी कि याचिकाकर्ता अनुसूचित जन-जाति की नहीं है। इसके बाद उसे नियुक्ति नहीं दी गई। पूर्व में हाईकोर्ट ने दो बार निर्देश दिए थे कि हाई पावर कमेटी यह तय करें कि याचिकाकर्ता मुडिया जाति की है या नहीं, लेकिन हाई पॉवर कमेटी ने जाति नहीं तय की। नरसिंहपुर कलेक्टर ने इस मामले में निर्णय दिया कि याचिकाकर्ता मुडिया जाति की नहीं है। इस मामले में फिर से याचिका दायर की गई।

फैसला करने का अधिकार केवल हाई पॉवर कमेटी को
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रम्हानंद पांडे ने तर्क दिया कि जाति के संबंध में फैसला करने का अधिकार केवल हाई पॉवर कमेटी को है। कलेक्टर किसी की जाति के संबंध में फैसला नहीं कर सकते है। इस मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आदिवासी कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को जवाब पेश करने के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन जवाब पेश नहीं किया गया। 16 नवंबर 2018 को एकल पीठ ने आवश्यक रूप से जवाब पेश करने का निर्देश दिया था, लेकिन गुरुवार को उनकी ओर से जवाब पेश नहीं किया गया। एकल पीठ ने जवाब पेश नहीं करने को गंभीरता से लेते हुए आदिवासी कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव पर 10 हजार रुपए कॉस्ट लगाई है।

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