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नागपुर में अब डेडिकेटेड कोविड हास्पिटल 102 हुए, 40 नए हास्पिटल जुड़े

नागपुर में अब डेडिकेटेड कोविड हास्पिटल 102 हुए, 40 नए हास्पिटल जुड़े

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  शहर में कोविड संक्रमितों का उपचार करने के लिए 40 नए डेडिकेटेड कोविड अस्पताल सेवा में दाखिल हो गए हैं। पहले से 62 निजी अस्पताल डेडिकेटेड कोविड अस्पताल घोषित किए गए हैं। अब डेडिकेटेड कोविड अस्पताल की संख्या 102 हो गई है। शुरुआती दौर में शासकीय वैद्यकीय अस्पताल और मेयो अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज की सुविधा थी। शहर में संक्रमितों की संख्या बढ़ने से िनजी अस्पतालों को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में परिवर्तित करने का सिलसिला शुरू है। महापौर के िनर्देश पर आयुक्त ने 40 नए अस्पताल को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाए जाने के आदेश जारी किए हैं।   

परफेक्ट हेल्थ सुपर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, धंतोली
न्यूक्लिअस मदर एंड चाइल्ड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल 
नेल्सन मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल
चौधरी हॉस्पिटल, सक्करदरा 
श्रीकृष्ण हृदयालय एंड क्रिटिकल केयर सेंटर 
डॉ. के. जी. देशपांडे मेमोरियल सेंटर फॉर ओपन हार्ट सर्जरी 
मेडिकेयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
निरामय हॉस्पिटल ऊंटखाना रोड 
सेंट्रल इंडिया कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल एंड रिसर्च इन्स्टीट्यूट 
बोरकर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
तामस्कर क्लिनिक रामदासपेठ 
लोटस हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर एंड मैटर्निटी होम 
सफल हॉस्पिटल, कांग्रेस नगर 
प्रेस्टीज हॉस्पिटल, छावनी 
जी. टी. पडोले हॉस्पिटल 
खलाटकर हॉस्पिटल रेशमबाग 
श्रावण हॉस्पिटल एंड किडनी इन्स्टीट्यूट 
रहाटे सर्जिकल हॉस्पिटल 
ग्रीन सिटी हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम 
मुखर्जी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल
आरएनएच हॉस्पिटल प्रा.लि.
आदित्य हॉस्पिटल क्रिटिकल केयर एंड इमरजेंसी सेंटर 
खोब्रागड़े चाइल्ड ट्रस्ट हॉस्पिटल एंड इंटेंसिव केयर इन्स्टीट्यूट 
आरोग्यम् सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल 
कलर्स चिल्ड्रेन हॉस्पिटल
जेनिथ हॉस्पिटल शिवाजी नगर 
तारांगण सर्जिकल हॉस्पिटल 
सुपर लाइफ हॉस्पिटल एंड रिसर्च इन्स्टीट्यूट
एलिक्झर मेट्रो सिटी हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर
अभियोग स्पाइन एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सेंटर एंड मैटर्निटी होम 
कुबड़े हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
जेन क्यूअर हॉस्पिटल 
एस. एस. मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल 
गार्सीयस इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस
मेट्रो हॉस्पिटैलिटी हॉस्पिटल 
आपुलकी वैरागड़े हॉस्पिटल 
शांति मोहन हॉस्पिटल 
स्वस्तिक क्रिटिकल केयर
इंद्रायणी स्पेशलिटी हॉस्पिटल
ग्रेस हॉस्पिटल

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।