comScore

बिहार: गोपालगंज जिला कृषि पदाधिकारी वेद नारायण सिंह की मनमानी, सीनियर के कहने पर भी नहीं बदल रहे पैक्स के खाद लाइसेंस पर प्रॉपराइटर का नाम, किसानों को हो रही असुविधा

बिहार: गोपालगंज जिला कृषि पदाधिकारी वेद नारायण सिंह की मनमानी, सीनियर के कहने पर भी नहीं बदल रहे पैक्स के खाद लाइसेंस पर प्रॉपराइटर का नाम, किसानों को हो रही असुविधा

डिजिटल डेस्क, पटना। जिले में अधिकारीयों की मनमानी का आलम यह है कि किसी दफ्तर में लीगल काम को लेकर जाने पर भी काम नहीं होता और दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं। मामला पैक्स से जुड़े खाद के लाइसेंस को लेकर है। दरअसल, पैक्स समिति खाद के लिए पैक्स अध्यक्ष को लाइसेंस मुहैया कराती है, ताकि अध्यक्ष सस्ते दाम पर सरकारी खाद लाकर किसानों को उपलब्ध करा सकें। लेकिन वर्तमान पैक्स अध्यक्षों का नाम अब तक लाइसेंस पर नहीं चढ़ा है, अभी तक हारे हुए प्रत्याशी का नाम ही समिति की लाइसेंस पर है, जिससे पैक्स अध्यक्ष किसानों को सस्ते दाम पर खाद मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। इस मामले में चार महीने पहले जब जिला कृषि पदाधिकारी वेद नारायण सिंह से पैक्स अध्यक्षों ने बात की, तो कृषि अधिकारी का जवाब था कि अभी ये मामला मेरे पास नया है, मैं इसमें अपने वरीय अधिकारी से बात कर कुछ बता पाऊंगा। 


इस मामले के चार महीने बीतने के बाद एक बार फिर जून महीने में पैक्स अध्यक्षों ने जब कृषि पदाधिकारी से बात की तो उन्होंने वही पुराना रटा-रटाया जवाब दिया। यानी चार महीने बीत जाने के बाद भी उन्होंने इस मसले पर संज्ञान लेना जरूरी नहीं समझा। साथ में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब आपको नया लाइसेंस बनवाना पड़ेगा। इस मसले पर जब जीडीएस छपरा से बात की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए जॉइंट डायरेक्टर कॉर्प एंड फार्म (पटना) से बात करने को कहा। जब जॉइंट डायरेक्टर कॉर्प एंड फार्म डॉ. ब्रजेश कुमार कुमार से बात की गई तो, उन्होंने कहा कि लाइसेंस पर प्रोपराइटर का नाम बदला जाता है। चूंकि यह लाइसेंस किसी का निजी न होकर पैक्स समिति का लाइसेंस है इसलिए जीते हुए प्रत्याशी का नाम उस पर चढ़ जाएगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ब्रजेश कुमार ने जिला कृषि पदाधिकारी की ओर से नए लाइसेंस बनवाने की बातों को गलत करार दिया और कहा ऐसा कुछ भी नहीं है, यह पुराना नियम है, इसमें कुछ नया नहीं है। ये बात जिला कृषि पदाधिकारी, वेद नारायण सिंह को पता है। मुझे समझ नहीं आ रहा वे क्यों नहीं लाइसेंस पर जीते हुए प्रॉपराइटर का नाम बदल रहे हैं। 

इसके बाद जब दोबारा जिला कृषि पदाधिकारी के सामने ये बात रखी गई तो उन्होंने जॉइंट डायरेक्टर ब्रजेश कुमार से बात कर ही इस मामले पर कुछ भी बताने की हामी भरी। जिला कृषि पदाधिकारी वेद नारायण सिंह ने बाद में बताया कि जॉइंट डायरेक्टर ने उन्हें कुछ भी साफ-साफ नहीं बताया है। दोबारा फिर जब हमने जॉइंट डायरेक्टर से बात की तो उनका कहना था कि इसमें कुछ नया नहीं है, जो नियम है वही चल रहा है। लाइसेंस पर नाम चढ़ता है, नया लाइसेंस नहीं बनता है। सीनियर अधिकारी के कहने के बावजूद जिले के नए जीते हुए पैक्स अध्यक्षों को लाइसेंस पर नाम बदलवाने को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी के दफ्तर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मौजूदा समय में कृषि सीजन होने से किसान पैक्स अध्यक्षों से सस्ता खाद उपलब्ध कराने का आग्रह कर रहे हैं। लेकिन अधिकारीयों का जो रवैया दिख रहा है उससे तो यही लगता है कि इस सीजन में भी किसानों को सस्ते दर पर मिलने वाले खाद से वंचित रहना पड़ेगा। जबकि पैक्स चुनाव के नतीजे दिसंबर 2019 के मध्य में ही जारी कर दिए गए थे। 6 महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 11 ये समस्या गौरा पैक्स, भेड़िया पैक्स, अमेयां पैक्स, करकटहां पैक्स और बैकुंठपुर पैक्स और पटखौली पैक्स में देखी जा रही है।

कमेंट करें
AfGpH