दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर में दो गुना पोल्यूशन, हकीकत हो रही बयां, कुछ वर्षों में हुई तेजी से बढ़ोतरी

August 5th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर में तेजी से पोल्यूशन बढ़ा है। अनेक विकास कार्य जारी हैं। बनाने के लिए सड़कें उखाड़ दी गई हैं, लेकिन फिलहाल यहां धूल को हवाओं का साथ मिल रहा है और इस कारण शहर में ‘लाइव प्रदूषण’ देखने को मिल रहा है। इस शहर के लिए ‘लाइव प्रदूषण’ नया शब्द है क्योंकि पिछले वर्षों की तुलना में नागपुर में वायु प्रदूषण लगभग दो गुना बढ़ गया है।

खतरनाक है यह
मानकों के अनुसार, नागपुर की हवाओं में सस्पेंडेंड पार्टिकल मैटर व रेस्पायरेबल पार्टिकुलेट मैटर की संख्या में वृद्धि हो रही है। सस्पेंडेंड पार्टीकुलेट मैटर और धूल कण होते हैं और हवा में रहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं जिनका साइज 10 माइक्रोग्राम से छोटा होता है। वहीं, रेस्पायरेबल पार्टिकल्स सांस लेने के साथ ही सीधे शरीर में पहंुचते हैं। ये 2.5 माइक्रोग्राम साइज के होते हैं। इनसे फेफड़ों के फंक्शन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, इनकी वजह से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, डिप्रेशन, बेचैनी जैसे रोगों की शिकायत हो जाती है। ह्वीकल से होने वाले प्रदूषण में भी इजाफा हुआ है। नागपुर में लूज मिट्टी से और धूल कणों से होने वाले प्रदूषण में इजाफा हुआ है।

दिन भर गुबार
सुबह जब लोग स्कूल ऑफिस और निजी कार्यों से बाहर जाते हैं तो धूल का गुबार छाया मिलता है। खासकर अमरावती रोड के वाडी इलाके से लेकर बर्डी के रास्तों तक ये गुबार दिन भर बना रहता है।

आंकड़े करते हैं पुष्टि
8, 9 व 10 जुलाई को वायु प्रदूषण का लेवल माॅडरेट पाया गया। मॉडरेट यानी जिसमें सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, फेफड़े संबंधी समस्या के अलावे हार्ट डिसीज और बच्चों को अनेक समस्याएं हो सकती हैं।

सबसे बड़ी वजह
कंस्ट्रक्शन साइट और सड़कों के किनारे से उड़ रही धूल प्रदूषण में और इजाफा कर रही कंस्ट्रक्शन साइट और जिन सड़कों का निर्माण हो रहा है, वहां उड़ रही धूल शहर के प्रदूषण में और इजाफा कर रही हैं। सांस की बीमारियां और एलर्जी तथा आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। फिलहाल, कंस्ट्रक्शन साइट की संख्या हमारे यहां ज्यादा हैं। धूल उड़ने का सबसे बड़ा कारण एक यह भी है कि अनेक भागों में सड़कों के निर्माण-कार्य के चलते रुक-रुक कर गाड़ियां चलती हैं। इस वजह से भी हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। 
(कौस्तुभ चटर्जी, संस्थापक ग्रीन विजिल संस्था)

हां, वायु प्रदूषण का स्तर दोगुना हुआ है
शहर में प्रदूषण का स्तर दोगुना हो गया है। वायु प्रदूषण इनमें सबसे पहले है। सड़कों पर उड़ रही धूल इसका मुख्य कारण है। पिछले महीने में एयर पाल्यूशन के स्तर में वृद्धि हुई है, इसमें कोई संदेह नहीं है। 
राकेश वानखेड़े, प्रादेशिक अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, महाराष्ट्र पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड 

रेस्पायरेबल पार्टिकुलेट मैटर ये हैं 
रेस्पायरेबल पार्टिकुलेट मैटर यानि पीएम 10 के कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर होती है, लेकिन इससे छोटे कणों यानि पीएम 2.5 हेल्थ के लिए खतरनाक हैं। इनका का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या इससे भी कम होता है। यह कण ठोस या तरल रूप में वातावरण में होते हैं। इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल हैं। सूक्ष्म आकार का होने की वजह से यह आसानी से फेफड़े तक पहुंच सकता है और फिर खून के जरिए हार्ट तक जा सकते हैं।

आरएसपीएम (रीस्पायरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) के कण हवा में घुलनशील होते हैं। इनका साइज दस माइक्रोन से भी कम (मानव के बाल की चौड़ाई के पांचवें भाग से भी कम) होता है।आरएसपीएम कार्बनिक और अकार्बनिक तत्वों का मिश्रण होते हैं। हालांकि यह कण बंद और खुले दोनों वातावरण में मिलते हैं, लेकिन ज्यादातर इनके मिलने की संभावना बंद वातावरण में होती है।