दैनिक भास्कर हिंदी: मुनगंटीवार ने कहा- खराब नहीं है महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति

September 18th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति को लेकर भारत सरकार के 15 वें वित्त आयोग के निष्कर्ष को लेकर प्रदेश सरकार की आलोचना पर प्रदेश के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने स्पष्टीकरण दिया है। मुनगंटीवार ने दावा किया है कि प्रदेश में आर्थिक संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि बुधवार को प्रदेश सरकार के वित्त विभाग की तरफ से राज्य कि आर्थिक स्थिति के बारे में 15 वें वित्त आयोग के सामने प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। इसके बाद केंद्रीय वित्त आयोग खुद ही प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति के बारे में खुलासा करेगा। मुनगंटीवार ने कहा कि वित्त आयोग आर्थिक स्थिति की तुलना करते समय कुछ वर्षों को छोड़ दिया है। इसलिए इस तरह के आंकडे सामने आए हैं। लेकिन हमें उम्मीद है कि वित्त विभाग सही आंकडे सामने रखेगा।

मुनगंटीवार ने कहा कि वित्त आयोग की रिपोर्ट से विपक्ष के नेताओं के चेहरे पर खुशी झलक रही है। लेकिन वित्त आयोग के खुलासे के बाद विपक्ष को प्रदेश की आर्थिक नीतियों के लिए सरकार को बधाई देने पर मजबूर होना पड़ेगा। राज्य के वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले साल 16 से 17 हजार करोड़ रुपए की कर्ज माफी दी है। इसके बावजूद राज्य 2 हजार करोड़ से ज्यादा के राजस्व सरप्लस में है। सरकार की आमदनी पिछले साल 90 हजार करोड़ रुपए से बढ़ कर 1 लाख 15 हजार करोड़ हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के राजकोषीय घाटा की मर्यादा 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इसको 1 प्रतिशत तक लाने में कामयाबी मिली है। उन्होंने कहा कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में प्रदेश में कर्ज लेने का भार साल 2005-06 में 25.2 प्रतिशत तक पहुंच गया था। वह फिलहाल 16.01 प्रतिशत तक लाया गया है। 

पूंजी निवेश में पीछे नहीं
मुनगंटीवार ने कहा कि वित्त आयोग ने एक तथ्य रखा है कि पूंजी निवेश में महाराष्ट्र पीछे है। लेकिन इसमें सच्चाई नहीं है। क्योंकि सरकार बजट में महामंडलों द्वारा किए गए पूंजी निवेश के आंकड़ों को नहीं जोड़ती। जबकि कर्नाटक में महामंडलों द्वारा किए गए पूंजी निवेश के आंकड़ों को बजट में दिखाया जाता है। हम वित्त आयोग को बताएंगे कि महाराष्ट्र में 2.50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा काम बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के लिए हो रहा है।
मुनगंटीवार ने कहा कि देश की आर्थिक-सामाजिक जनगणना में प्रदेश के 60 लाख 67 हजार लोग आते हैं। इसका मतलब यह है कि प्रदेश में गरीबी निर्मूलन के लिए ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। प्रदेश सरकार इस दिशा में काम भी कर रही है।  

महाराष्ट्र सरकार की वित्त आयोग से प्रमुख मांगें 

-    विदर्भ और मराठवाड़ा के लिए 25 हजार करोड़ रुपए की विशेष निधि
-    मुंबई के लिए 50 हजार करोड़ रुपए की मांग 
-    पर्यावरण और ग्रीन महाराष्ट्र के लिए विशेष धन राशि की मांग 
-    ग्राम पंचायतों की तर्ज पर पंचायत समितियों और जिला परिषद को राशि की मांग 

क्या कहती है वित्त आयोग रिपोर्ट

-    प्रदेश 2009-13 से 2014-17 के बीच राजस्व प्राप्ति में बढ़ोतरी नहीं हो सकी।
-    प्रदेश में राजस्व की बढोतरी में गिरावट आई है। साल 2009-13 के 19.44 फीसदी की तुलना में 2014-17 के दौरान 8.16 फीसदी रह गई। 
-    कुल खर्च में से पूंजीगत व्यय का प्रतिशत 2013-17 के बीच 11 से 12 प्रतिशत रहा।  
-    प्रदेश के 34 जिलों में से विदर्भ और मराठवाड़ा के 16 जिलों की प्रति व्यक्ति आय राज्य एवं राष्ट्रीय औसत से नीचे है।
-    प्रदेश के 351 विकास ब्लॉक में से 125 विकास ब्लॉकों की पहचान मानव विकास सूचकांक पर सामाजिक रूप से पिछड़े ब्लॉक के रूप में हुई है।
-    प्रदेश में महज 18 प्रतिशत सिंचाई क्षेत्र है। जबकि देश का औसत 35 प्रतिशत से अधिक है।

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