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शिक्षा संस्थान फीस भरने की सख्ती न करें -UGC

शिक्षा संस्थान फीस भरने की सख्ती न करें -UGC

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  लॉकडाउन में आर्थिक संकट को देखते हुए शिक्षा संस्थाओं को विद्यार्थियों पर फीस भरने की सख्ती न करने के आदेश जारी हुए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नोटिफिकेशन जारी कर नागपुर विश्वविद्यालय सहित देशभर के शिक्षा संस्थानों के लिए यह फैसला लागू किया है। यूजीसी ने शिक्षा संस्थानों को स्थिति सामान्य होने तक विद्यार्थियों को ट्यूशन फीस और परीक्षा फीस में रियायत देने या अन्य कोई विकल्प देने को कहा है। 

यूजीसी ने  जारी की हेल्पलाइन में इस बाबत कई शिकायतें आने के बाद यह नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसके पूर्व प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों के लिए एआईसीटीई भी इस प्रकार का निर्देश जारी कर चुकी है। राज्य सरकार भी स्कूलों के लिए 30 मार्च को जीआर जारी कर फीस के लिए सख्ती नहीं करने को कह चुकी है। 8 मई को स्कूलों को फीस नहीं बढ़ाने के आदेश दिए गए थे। हाल ही में नागपुर जिलाधिकारी ने स्कूल प्राचार्यों के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में भी इसी बात पर जोर दिया। प्राचायों से यह भी अपील की कि, यदि संभव हो, तो वे फीस कम करने पर भी विचार करें।

एआईसीटीई भी लागू कर चुका है
उल्लेखनीय है कि, इसके पूर्व एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग और एमबीए जैसे अन्य कॉलेजों के लिए ऐसा ही फैसला लागू किया था। एआईसीटीई के तहत देश के कुल 10,897 कॉलेज हैं, जिनमें 32 लाख 84 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। उल्लेखनीय है कि, नागपुर में 16 मार्च से और देश भर में 24 मार्च से लॉकडाउन लागू हुआ था। इस वक्त तक कई विद्यार्थियों की सेमिस्टर फीस, परीक्षा फीस और अन्य कई प्रकार की फीस बाकी थी। लॉकडाउन लागू होने और लगातार इसकी अवधि बढ़ने के कारण कॉलेजों की फीस लटक गई थी। एक ओर जहां कॉलेजों की ओर से विद्यार्थियों पर फीस के लिए दबाव बनाया जा रहा था। दूसरी ओर कॉलेजों ने शिक्षक और कर्मचारियों का वेतन भी रोक दिया था। ऐसे में एआईसीटीई को मामले में दखल देना पड़ा।

वेतन पर निर्देश नहीं
यूजीसी ने अपने निर्देश में विद्यार्थियों काे तो राहत दी है, लेकिन गैर अनुदानित कॉलेजों के शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन संबंधी निर्देश अब तक सामने नहीं आए हैं। कई कॉलेजों ने शिक्षकों-कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। ऐसी स्थिति को देखते हुए एआईसीटीई ने बीते दिनों सभी मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग, एमबीए और तकनीकी शिक्षा संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि, वे अपने शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन न रोकें। वेतन रोकने से राष्ट्रीय आपदा से जूझ रहे देश की स्थिति और विकट हो जाएगी। वेतन नहीं मिलने से यह लोग लॉकडाउन में सहयोग करना बंद कर देंगे। यूजीसी के इस दिशा में अब तक निर्देश आना बाकी है।

 
 
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।