comScore

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होंगे एग्जाम , गाइडलाइन का इंतजार

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होंगे एग्जाम , गाइडलाइन का इंतजार

डिजिटल डेस्क, नागपुर । 1 से 15 जुलाई के बीच होने जा रही सीबीएसई की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में सोशल डिस्टेंसिंग किसी प्रकार होगी और बीमार विद्यार्थियों पर क्या नीति है, इस पर स्कूलों को बोर्ड की विस्तृत गाइडलाइन का इंतजार है। परीक्षा केंद्रों को इस बात की चिंता है कि यदि थर्मल स्क्रीनिंग में किसी विद्यार्थी का तापमान ज्यादा निकलता है, विद्यार्थी को सर्दी-खांसी या अन्य कोई लक्षण दिखता है, तो क्या उस विद्यार्थी की परीक्षा के लिए कोई अलग से व्यवस्था करनी है या फिर उसे परीक्षा से वंचित रखा जाएगा। ऐसे में परीक्षा केंद्र सीबीएसई की ओर से विस्तृत गाइडलाइन के इंतजार में हैं। सीबीएसई स्कूल समूह सहोयद की प्रमुख रीना दर्गन के अनुसार इस वर्ष सीबीएसई ने होम सेंटर पर  परीक्षा लेने का निर्णय तो लिया है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किस प्रकार करना है, इस पर दिशा-निर्देशों का इंतजार है।

परीक्षा केंद्र पर 50 से भी कम विद्यार्थी
नागपुर में हर वर्ष 12वीं कक्षा में अमूमन 1500 परीक्षार्थी परीक्षा देते हैं। अब तक करीब 10 परीक्षा केंद्र होते थे, लेकिन होम सेंटर पॉलिसी के बाद परीक्षा केंद्रों की संख्या लगभग 20 हो जाएगी। एक परीक्षा केंद्र पर करीब 50 विद्यार्थी ही होंगे। फिलहाल एक परीक्षा कक्ष में 15 विद्यार्थियों को बैठाने की तैयारी है।

इन विषयों की परीक्षा होगी
पूरे देश में सीबीएसई 1 से 15 जुलाई के बीच 29 विषयों की परीक्षा लेगी। इसमें से नागपुर में सिर्फ 12वीं कक्षा की ही परीक्षा होगी, क्योंकि लॉकडाउन के पूर्व 10वीं के सारे पेपर लिए जा चुके थे। 12वीं की बिजनेस स्टडीज, जियोग्राफ्री, हिंदी इलेक्टिव, हिंदी कोर, होम साइंस, सोशियोलॉजी, कंप्यूटर साइंस-ओल्ड, कंप्यूटर साइंस-न्यू, इनफॉरमेशन प्रैक्टिस-ओल्ड, इनफॉर्मेशन प्रैक्टिस-न्यू, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और बायोक्टेक्नोलॉजी विषय का पेपर होगा। 

कमेंट करें
fTxal
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।