दैनिक भास्कर हिंदी: होमगार्ड जवानों का जितना वेतन नहीं उससे ज्यादा मकान किराया मांग रहा फैक्ट्री प्रबंधन

February 22nd, 2019

डिजिटल डेस्क ,जबलपुर । राजकीय आपदा प्रबंधन, भवन गिरने पर बचाव, फायर इमरजेंसी, फ्लड, भूकंप, स्कूल सेफ्टी, स्नेक बाइट्स और रेल हादसे के दौरान लोगों को राहत और बचाने होमगार्ड के जवान प्रदेश के हर जिले में तैनात हैं। इतना ही नहीं चुनाव से लेकर पुलिसिंग के साथ-साथ आयुध निर्माणियों की सुरक्षा में इनकी इनकी सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन इनका वेतन इतना नहीं है कि वे प्राइवेट में मकान किराए से ले सकें। जिसके कारण ओएफके की सुरक्षा में तैनात कर्मचारी फैक्टरी द्वारा आवंटित क्वाटरों में निवास कर रहे हैं। फैक्टरी प्रबंधन ने अब इन कर्मचारियों को हर माह 27 हजार रुपए किराया चुकाने का नोटिस  थमाया है। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है, यदि किराया नहीं चुकाया जाता है, तो आवास खाली करने कहा गया है। होमगार्ड कर्मचारियों का कहना है कि उनकी इतनी पगार ही नहीं है, जितना किराया मांगा जा रहा है। ऐसे आधा सैकड़ा होमगार्ड जवानों को नोटिस जारी किया गया है।

आवासों को सात दिन में खाली करें
उल्लेखनीय है कि आयुध निर्माणी खमरिया प्रबंधन द्वारा सरकारी आवासों की लायसेंस(डेमेज चार्ज) का पुनरीक्षण 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया है। अरएन प्रसाद कार्य प्रबंधक/आरएनपी  द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक बकाया लायसेंस फीस की गणना करके उसे वसूल किया जाना है। जिसके तहत डेमेज किराया 1519 के स्थान पर पहले माह में 5400 रुपए, दूसरे माह में 5940 रुपए, तीसरे माह में 6480 रुपए, चौथे माह में 7560 रुपए एवं बारहवें माह से लगातार 27000 रुपए किया गया है। आदेश में साफ कहा गया था कि सभी को हिदायत दी जाती है कि सरकारी आवासों को सात दिन में खाली करें या फिर किराया को जमा करें, नहीं तो पीपीई एक्ट 1971 के तहत बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। संबंधित आदेश के बाद अब निचले कर्मचारी जो यहां पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं उनमें हड़कंप की स्थिति निर्मित है। सबसे ज्यादा परेशान होमगार्ड के कर्मचारी हैं। होमगार्ड जवानों का कहना है कि हमारा तो इतना वेतन ही नहीं हैं कि वह यह किराया दे सकें। वहीं उनका कहना है कि जब 2016 में यह आदेश जारी किया गया था, तो उस समय इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई। अचानक आदेश का जिन्न बहार क्यों निकाला गया। होमगार्ड जवानों ने फैक्टरी प्रबंधन से उचित कार्रवाई की मांग की है।
अवैध कब्जा है आवासों में-
बताया जाता है कि जो फैक्टरी से सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनको 6 माह के अंदर आवासों को खाली करना था, लेकिन उनके द्वारा अवासों को खाली नहीं किया  गया है। इसके साथ ही पुलिस के जवान भी यहां पर कब्जा करे हुए हैं, जिसके कारण फैक्टरी में कार्य करने वाले कर्मचारियों को आवास उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण भी संबंधित आदेश को जारी किया जाना बताया जा रहा है।
जर्जर होते जा रहे आवास-
जो आवास बचे हैं, वह जर्जर हो चुके हैं, जहां रहना मुश्किल है, इसके  बाद भी यहां पर दूसरे विभाग के कर्मचारी कब्जा जमाए हुए हैं। प्रबंधन का कहना है कि यहां सुधार कार्य भी होना है। इसके साथ ही जो किराया बढ़ाया गया है, वह नियमों के अनुसार ही बढ़ाया गया है।