दैनिक भास्कर हिंदी: फडणवीस के हाथ BJP की पतवार, क्या चुनावी अखाड़े में सियासी मुद्दों के बीच पार लगेगी नैय्या ?

December 9th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मध्यप्रदेश चुनाव परिणाम को कुछ घंटे बाकी हैं, जहां बीजेपी मुख्यमंत्री शिवराज का सियासी करियर दांव पर लगा है, वहीं महाराष्ट्र में पार्टी के सियासी पेंच कुछ अलग ही हैं। यहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में चुनावी पारी खेली जाएगी। यानी महाराष्ट्र में बीजेपी के बड़े स्टाक प्रचारक खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही होंगे। लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही भाजपा इस बार फडणवीस के पांच साल की उपलब्धियों को जनता के बीच रखने जा रही है। साथ ही विपक्ष को घेरने के लिए खास रणनीति बनाई जा रही है।

सीएम पार्टी के स्टार प्रचारक

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में चुनावी बिगुल फूंका जाएगा। राज्य में भले ही पहली बार बीजेपी सत्ता में आई हो, लेकिन पूरे 5 साल तक सरकार चलाने का उसके पास अच्छा अनुभव है। गठबंधन सरकार होने के बाद भी मुख्यमंत्री फडणवीस अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रहे हैं। जबकि सहयोगी पार्टी शिवसेना ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश की, कई बार तो शिवसेना की तरफ से ऐसे बयान आए, जिससे संशय पैदा होना शुरु हो गया था कि यह गठबंधन टिकेगा भी या नहीं। कभी खींचतान के बाद शिवसेना के रुख में नर्मी दिखी, तो कभी बीजेपी एक कदम पीछे हटी।

मराठा आरक्षण का मास्टर स्ट्रोक

राज्य में साल 1980 के दशक से मराठा आरक्षण की मांग उठाईजा रही थी। तब मराठा कर्मचारियों के नेता अन्ना साहेब पाटिल ने आंदोलन का नेतृत्व किया। लेकिन भूख हड़ताल के दौरान उनकी जान चली गई थी। इस बार आंदोलन होने के बाद सीएम ने साफ कहा था कि वो समाज को गिफ्ट दोने जा रहे हैं, सरकार इसपर विधेयक लाई, जिसे विधानमंडल में पास करा लिया गया। सरकार ने बड़ा दांव खेलते हुए मराठाओं को नौकरी और शिक्षा में 16 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया।

सरकार के गले की फांस विदर्भ किसान आत्महत्या मुद्दा

मराठा आरक्षण का मुद्दा हो यां किसान आंदोलन सीएम के आश्वासन और फैसले विपक्ष पर भारी पड़ते दिखाई दिए। कर्जमाफी की घोषणा के बाद सरकार ने किसानों का आक्रोश कुछ हद तक कम करने में सफलता भी हालिस की, लेकिन विदर्भ में किसानों की आत्महत्या के मामले अब भी सरकार के गले की फांस बने हैं। इसके अलावा दूसरे समाज भी आरक्षण की मांग कर रहे हैं। मराठा आंदोलन के मास्टर स्ट्रोक के बाद  अलग-अलग जातियों के आंदोलन से न निपट पाना सरकार से सामने अड़चन बन सकता है। जिसमें मुस्लिम, धनगर, जैसे कई वर्गों के साथ लाना चुनौती है।

कमजोर विपक्ष

वैसे देखा जाए तो विपक्ष फडणवीस के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं खड़ी कर सका है। प्रदेश में कांग्रेस खास आक्रामक नहीं है। एनसीपी और कांग्रेस भले ही साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन इन पार्टियों के मुद्दे भी अपने-अपने हैं। जैसे जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं। सहयोगी पार्टी शिवसेना का सरकार के प्रति नरम दिख रहा है,  नाणार परियोजना को लेकर बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रही शिवसेना अब अयोध्या में मंदिर बनाने की बात करने लगी है।

सरकार की उपलब्धियां

फडणवीस सरकार ने शहरों में मेट्रो का जाल बिछाना शुरु किया। नागपुर महा मेट्रो सरकार की खास परियोजना है, जिसपर काफी खर्च किया जा चुका है।
मुंबई को सीधे नागपुर से जोड़ने वाला 800 किलोमीटर लंबा समृद्धि एक्सप्रेस वे सरकार की बड़ी परियोजनाओं में एक है, जिसमें जमीन अधिग्रहण का काम तय समय में पूरा हुआ है।
जलयुक्त शिवार योजना को लेकर विपक्ष कई सवाल खड़े करता रहा, लेकिन राज्य के 16 हज़ार गांव की पानी समस्या दूर करने की मंशा से सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
FDI की बात करें, दो बाक़ी राज्यों के मुकाबले एफडीआई आकर्षित करने में महाराष्ट्र नंबर वन रहा है। सरकार के दावों के तहत देश के कुल FDI का 49% हिस्सा अकेले महाराष्ट्र में ही आया है।

श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट से 500 करोड़ रुपए का कर्ज

सरकार श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट से 500 करोड़ रुपए का कर्ज ले रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील ने निशाना साधते कहा था कि सरकार की तिजोरी में पैसे होने के बावजूद शिर्डी ट्रस्ट से कर्ज लेना हास्यास्पद है। ट्रस्ट से बिना ब्याज के कर्ज लिया है। इसपर विपक्ष सरकार से स्पष्टीकरण मांग चुका है। 

सूखे से मुश्किल

ताजा मुद्दों में सूखा और फसल बर्बादी सरकार के सामने परेशानी का सबब बनकर उभर रहा है। इसे लेकर सरकार ने केंद्र से राहत पैकेज की मांग की है। फडणवीस ने केन्द्र से तकरीबन 8 हजार करोड़ रुपए की वित्तिय सहायता मांगी है। दिल्ली में मुख्यमंत्री फडणवीस ने PMO में प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्रा से मुलाकात कर विकास परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा की थी। हालांकि केन्द्रीय टीम पहले ही यहां सूखा प्रभावित मराठवाड़ा में जायजा लेने पहुंच गई थी। इससे पहले सरकार ने विधानमंडल शीतकालिन अधिवेशन के पहले ही दिन दोनों सदनों में 20,326 करोड़ रुपए की पूरक मांग पेश की थी। जिसमें सूखाग्रस्त किसानों की मदद के लिए 2200 करोड़ का प्रावधान था। चुनावी साल होने के कारण फडणवीस की राहें मुश्किलों भरी हो सकती हैं। 180 तहसील में सूखे की स्थिति है, फ़सल बर्बादी से किसान परेशान हैं। इस सब के बावजूद प्रदेश की जनता का रुझान किस ओर होगा, देखने वाली बात होगी।
 

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