दैनिक भास्कर हिंदी: आधार की जेराक्स लेकर परिचित ने लिया लाखों का लोन, ठगी गई भूमिहीन महिला

February 1st, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  समीपस्थ कोंढाली की रहने वाली एक आदिवासी महिला को बगैर कोई कर्ज लिए पचास लाख रुपए से अधिक का बैंक कर्ज भरने का नोटिस मिला है। पता चला है कि किसी ने उनके दस्तावेज और हस्ताक्षर लेकर बकरी के लिए लोन लेकर उनके साथ ठगी की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आदिवासी  बाहुल्य  बिहालगोंदी के भूमिहीन खेतिहर  मजदूर 37 वर्षीय  कल्पना अशोक  परतेती  को आईडीबीआई बैंक सिविल लाइंस, नागपुर के डेप्युटी जनरल मैंनेजर  क्रेडिट मानिटरिंग ग्रुप नयन देसाई के हस्ताक्षर का  50 लाख 72 हजार 220 रुपए (पचास लाख बहत्तर  हजार दो सौ बीस रुपए) का बैंक कर्ज भरने का पहला नोटिस  12 जनवरी को मिला। इसके बाद दूसरा नोटिस 17 जनवरी  को आईडीबीआई  सिविल लाइंस बैंक के हेड के दस्तखत का मिला। उसमें भी  बैंक के 50,72,220 रुपए के बैंक कर्ज भरने का नोटिस है। 

और भी लोगों के नाम नोटिस
बताया जाता है  कि बिहालगोंदी  के  साथ-साथ काटोल  तहसील  के  खापा  सोनार,  मूर्ति,  वलनी,  तांदुलवाणी  गांव के अनेक  आदिवासियों को इसी प्रकार के  लाखों  रुपए का कर्ज भरने का नोटिस मिल रहा है। आदिवासी समाज के लोगों को  गुमराह कर  उनके नाम पर  करोड़ों की  हेरा-फेरी करने वाला कोई गिरोह काम कर रहा है। इसका मुखिया कौन है, यह पता लगाने के लिए कमलाकर नागोसे  से  संपर्क  करने  का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। कल्पना परतेती ने  बताया  कि अब  हम नागपुर जिले के पालकमंत्री  चंद्रशेखर बावनकुले से मिलकर न्याय की मांग करेंगे।

आधार कार्ड की जेरॉक्स लेकर 15-16 अंग्रेजी में लिखे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए 
कल्पना परतेती के पति अशोक परतेती ने बताया कि आज तक हमने  एक भी  रुपए का बैंक कर्ज नहीं लिया है। कल्पना परतेती ने बताया कि एक वर्ष पूर्व मायके के परिचित कमलाकर नागोसे ने हमारे घर में आकर बताया कि बकरियों के लिए लोन की योजना है। इन लोन के लिए ज्यादा  झंझट नहीं है। सिर्फ आधार कार्ड की  जेराक्स पर बकरियों का  लोन मिल जाएगा। उनके दोनों भाई गंगाधर विठोबा एडमे तथा रामाजी विठोबा एडमे के आधार कार्ड की जेराक्स दिखाई। दोनों भाइयों ने लोन के फार्म भरने के लिए अपने आधार कार्ड की जेराक्स देने की जानकारी नागोसे ने दी। इसलिए  मैंने भी अपने आधार कार्ड की जेराक्स दे दी। आठ-दस दिन बाद कमलाकर नागोसे फिर से मेरे घर जीप लेकर आया। उसमें सात आठ लोग बैठे थे। इनमें से एक दो व्यक्ति परिचित भी थे।

कमलाकर नागोसे ने कहा कि आपके बकरियों के लोन के लिए नागपुर जाकर फार्म भरना है। इनके साथ आपका लोन केस बनाने के लिए नागपुर चलना पड़ेगा। तब मैं कमलाकर नागोसे के कहने पर सबके साथ नागपुर गई। वहां बैंक में हम सबके 15-16 अंग्रेजी में लिखे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। मैंने कमलाकर से इसके  संबंध में पूछा। तब उसने कहा कि यह बकरियों के लोन के फार्म पर हस्ताक्षर हो रहे हैं। आप सबका  बैंक लोन जल्द ही मंजूर हो जाएगा। इसके बाद हम सभी को अपने अपने  गांव में लाकर छोड़ दिया। कुछ महीने बाद चेक बुक पोस्ट द्वारा आई। विगत एक साल में बकरियों के लिए लोन तो नहीं मिला, लेकिन गत सप्ताह नागपुर के आईडीबीआई बैंक के डेप्युटी जनरल मैंनेजर क्रेडिट मानिटरिंग ग्रुप नयन देसाई के हस्ताक्षर का पहला नोटिस मिला है। दूसरा नोटिस  आईडीबीआई बैंक सिविल लाइन के हेड के हस्ताक्षर का मिला है। जिसमें  पचास लाख बहत्तर हजार दो सौ बीस रुपए के लिए हुए लोन को भरने का नोटिस है। मैं भूमिहीन आदिवासी  महिला हूं। मैं और मेरे पति अशोक परतेती खेतिहर मजदूरी करते हैं। तीन बेटियां हैं, जिसमें से दो काटोल होस्टल में  रहकर पढ़ाई  करती हैं। एक छठवीं कक्षा में है जो हमारे साथ रहती है।