दैनिक भास्कर हिंदी: आर्णी में मिला दुर्लभ पैंगोलिन, रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा

June 18th, 2020

डिजिटल डेस्क, आर्णी(यवतमाल)।  आर्णी में बीती रात प्रभाग 8 में विठ्ठल मंदिर क्षेत्र में रास्ते पर वज्रशल्क (पैंगोलिन) विचरण करता दिखाई दिया। घूमते-घूमते वह नाली में  चला गया । क्षेत्र के युवकों ने नाली में जाते हुए पैंगोलिन को देखा युवकों ने इसकी जानकारी वनविभाग को दी।  वनविभाग के रेस्क्यू दल ने नागरिकों के सहयोग से वज्रशल्क पैंगोलिन (अनूसुची 1) को पकड़ा तथा गुरुवार को उसे जंगल मे छोड़ दिया।  वनविभाग से मिली जानकारी के अनुसार दुर्लभ वन्यजीव माने जाने वाला पैंगोलिन(वज्रशल्क) कल रात्रि 10. 30 बजे के आसपास आर्णी के प्रभाग 8 में विठ्ठल मंदिर क्षेत्र में रस्ते पर विचरता हुआ कुछ युवकों को दिखाई दिया।युवकों के शोर मचाने से वहां और भी लोग जमा हो गए।  इसकी जानकारी आर्णी के वनविभाग कार्यालय को दी गई। रात्रि मे ही रास्ते से यह पैंगोलिन नाली में चला गया। 

आर्णी वनपरिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय के वनपरिक्षेत्राधिकारी आर बी रोडगे के मार्गदर्शन में  वनविभाग रेस्क्यू दल के सदस्य निलेश चव्हाण वनरक्षक बेलोरा, एम के जाधव,अमोल श्रीनाथ, प्रफूल कोल्हे दीपक सपकाले  सहित क्षेत्र के युवक सुयोग चिंतावार, सचिन निलावार, विनोद राउत आदि के सहयोग से नाली से बाहर निकाला गया तथा उसे पकड़कर आर्णी वनविभाग कार्यालय लाया गया। पैंगोलिन पुर्णरुपसे स्वस्थ होकर इस दुर्लभ वन्य जीव की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये की कीमत बताई जाती है। इस वन्यजीव का दवाइयों के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है। देशी पैंगोलिन को जिंदा पकड़ा गया। यह इंडियन पैंगोलिन होकर  4 से 5 किलो  व 100 सेमी लंबा है । इसकी खाल बहुत मोटी होती है। इसकी खाल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में डेढ़ से दो लाख रूपये है। इसके मांस की भी कीमत अधिक है।  यह वन्यजीव लगातार शिकार होने के कारण विलुप्त हो गए हैं। ऐसी  जानकारी  वनपरिक्षेत्रधिकारी आर बी रोडगे ने दी। संभवतः आर्णी में यह प्रथमतः दिखाई दिया। इसे आर्णी वनविभाग क्षेत्र के जंगल मे वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति में जंगल में छोड़ा गया।