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महाराष्ट्र में शीघ्र मिलेंगे चार हजार नए डॉक्टर 

महाराष्ट्र में शीघ्र मिलेंगे चार हजार नए डॉक्टर 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के विभिन्न सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में फरवरी-2019 में एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर इंटर्नशिप पूरी करने वाले विद्यार्थियों को अस्थाई डिग्री प्रमाण पत्र दिया जाएगा। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने यह निर्देश दिए हैं। इस फैसले से एमबीबीएस परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थी महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन करा सकेंगे। इससे लगभग चार हजार डॉक्टर कोरोना से लड़ाई में चिकित्सा सेवा देने के लिए उपलब्ध हो सकेंगे।

देशमुख ने रविवार को नाशिक स्थित महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिलीप म्हैसेकर को इंटर्नशिप पूरी करने वाले विद्यार्थियों को तत्काल डिग्री प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। देशमुख ने कहा, ‘इस फैसले से कोरोना काल में चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए बड़े पैमाने पर डॉक्टर उपलब्ध हो सकेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव कम होगा।’ चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय मुखर्जी और चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. तात्याराव लहाने ने संबंधित डॉक्टरों की सेवाएं चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले अस्पतालों में लेने को कहा है। 

फरवरी 2020 में इंटर्नशिप पूरी करने वालों को दिए डाएंगे अस्थाई प्रमाणपत्र
महाराष्ट्र के विभिन्न सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में फरवरी-2019 में एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर इंटर्नशिप पूरी करने वाले विद्यार्थियों को अस्थाई डिग्री प्रमाण पत्र दिया जाएगा। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने यह निर्देश दिए हैं। इस फैसले से एमबीबीएस परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थी महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन करा सकेंगे। इससे लगभग चार हजार डॉक्टर कोरोना से लड़ाई में चिकित्सा सेवा देने के लिए उपलब्ध हो सकेंगे।

 देशमुख ने  नाशिक स्थित महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिलीप म्हैसेकर को इंटर्नशिप पूरी करने वाले विद्यार्थियों को तत्काल डिग्री प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। देशमुख ने कहा, ‘इस फैसले से कोरोना काल में चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए बड़े पैमाने पर डॉक्टर उपलब्ध हो सकेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव कम होगा।’  चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय मुखर्जी और चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. तात्याराव लहाने ने संबंधित डॉक्टरों की सेवाएं चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले अस्पतालों में लेने को कहा है। 
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।