दैनिक भास्कर हिंदी: नये रेत नियम जारी : ग्राम पंचायतें और नगरीय निकाय करेंगी खदानों का संचालन

September 22nd, 2018

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में नई रेत नीति बनाने के बाद अब इस नीति के तहत नई रेत खनन नीति भी जारी कर दी है। इन नियमों के तहत अब रेत खनन के ठेके राज्य खनिज निगम नहीं देगा बल्कि जिन क्षेत्रों में रेत की स्वीकृत खदानें हैं उन क्षेत्र की ग्राम पंचायतें एवं नगरीय निकाय इन रेत खदानों का संचालन करेंगे। यही नहीं सरकार द्वारा इस संबंध में आम लोगों को सुविधा देने के लिये सेण्ड पोर्टल भी बनाया है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति विहित शुल्क जमा कर संबंधित ग्राम पंचायत या नगरीय निकाय द्वारा संचालित रेत खदान से सीधे अपने ट्रकों के माध्यम से रेत निकाल कर ले जा सकेगा।

ज्ञातव्य है कि प्रदेश में कुल 1266 रेत खदानें चिन्हित हैं। इनमें नर्मदा नदी पर 160 तथा अन्य नदियों पर 1106 खदानें चिन्हित हैं। नये नियमों में आठ मामलों में रेत निकालने अथवा हटाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। ये हैं : किसी पुल से 200 मीटर तक। किसी जलप्रदाय योजना या जल संसाधन स्कीम के 200 मीटर अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में। राष्ट्रीय राजमार्ग तथा रेल्वे लाईन के किनारों से 100 मीटर तक। किसी नहर, बांध या भवन से 50 मीटर तक। राजकीय राजमार्ग के किनारों से 50 मीटर तथा अन्य सडक़ों के किनारों से 10 मीटर तक। ऐसे क्षेत्र जोकि बाढ़ नियंत्रण हेतु निर्मित किये गये हैं, से निर्धारित दूरी तक। सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्व के स्थल के निकट उनकी सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुये, इन स्थानों से 200 मीटर तक। ऐसे क्षेत्र जो जिना कलेक्टर द्वारा पर्यावरण या अन्य कारण से प्रतिबंधित घोषित किये गये हैं। इसके अलावा नियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि नर्मदा नदी के किनारे स्वीकृत रेत खदानों में रेत खनन हेतु मशीनों का उपयोग नहीं किया जायेगा। 

नये नियमों में बताया गया है कि ग्राम पंचायतें और नगरीय निकायों को उनके द्वारा संचालित रेत खदान पर 75 रुपये प्रति घनमीटर रायल्टी तथा इसके अतिरिक्त 50 रुपये प्रति घनमीटर शुल्क जिला खनिज प्रतिष्ठान को देय होगी। 75 रुपये प्रति घनमीटर रायल्टी में से 50 रुपये संबंधित ग्राम पंचायत या नगरीय निकाय के खाते में जायेगी और शेष 25 रुपये राज्य खनिज निगम को दिये जायेंगे। 
नये नियमों में निजी व्यक्तियों द्वारा रेत का भण्डारण कर उसका विक्रय करने की भी प्रावधान किया गया है तथा इसके लिये उन्हें अनुज्ञप्ति लेनी होगी। स्वयं के निर्माण हेतु कोई भी व्यक्ति अपने यहां 50 घनमीटर रेत का भण्डारण कर सकेगा लेकिन ऐसा व्यक्ति कोई कालोनाईजर या ठेकेदार नहीं हो सकेगा। निजी भूमि पर भी रेत खनन हेतु अनुज्ञप्ति लेनी होगी। रेत खनन स्थलों पर रेत ढोहने वाले वाहनों पर जीपीएस लगाये जाने का भी प्रावधान किया गया है।

अवैध उत्खनन पर होगी यह कार्यवाही
नियमों में बताया गया है कि अवैध उत्खनित या भण्डारित रेत खनिज पर रायल्टी का न्यूनतम 60 गुना या रुपये बीस हजार रुपये, इनमें से जो भी अधिक हो, जुर्माना लगाया जा सकेगा। इतनी ही और राशि पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रुप में भी वसूली जायेगी। पहली बार प्रकरण बनने पर तो संबंधित वाहन एवं औजार राजसात नहीं होंगे लेकिन दूसरी बार प्रकरण बनने पर अनिवार्य रुप से राजसात होंगे।

इनका कहना है
‘‘नये रेत नियम आम जनों की सुविधा प्रदान करने के लिये बनाये गये हैं तथा पोर्टल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति रेत निकाल सकेगा। रेत की दरें संबंधित ग्राम पंचायतें एवं नगरीय निकाय तय करेंगे तथा भण्डारण करने वाले स्टाकिस्ट भी अपनी दरें तय कर सकेंगे। - एनके हंस, सुपरिन्टेंडेंट जियोलाजिस्ट, राज्य खनिज संचालनालय मप्र

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