दैनिक भास्कर हिंदी: निजी जानकारी शेयर करना हो सकता है खतरनाक, शहर में बढ़ा साइबर क्राइम

November 16th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  संतरानगरी में साइबर अपराध का ग्राफ बढ़ने लगा है। इसके बढ़ने के पीछे कारण लोगों में इंटरनेट और सोशल मीडिया की जानकारी की अज्ञानता है। वह अपने बारे में और अपने परिवार के व्यक्तिगत जानकारियाें को सोशल मीडिया पर शेयर कर ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार नागपुर में इस साल 1500 से अधिक साइबर अपराध के मामले सामने आए हैं। इसमें से कई लोगों ने समस्या हल होने के बाद पुलिस के पास शिकायत भी नहीं की है। वर्ष 2017 में करीब 1400 साइबर अपराध से जुड़े मामले सामने आए । इस अपराध के पीड़ितों का मानना है कि उनकी समस्या को पुलिस ने सुलझा दिया, तो शिकायत करने से क्या फायदा। पिछले 15 महीने में साइबर अपराध शाखा पुलिस ने पीड़ित नागरिकों के 70 लाख रुपए नकदी वापस मिलने में मदद की। इनमें से कई लोगों के साथ ऑनलाइन ठगी की गई थी। 

ऐसे हो सकता है बचाव 
अपने इंटरनेट की बैंकिंग और बैंकिंग लेन-देन का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक स्थान जैसे कि साइबर कैफे, ऑफिस, पार्क, सार्वजनिक मीटिंग और किसी भीड़ वाले स्थान पर न करें। किसी भी प्रकार के बैंकिंग लेन-देन के लिए आप अपने पर्सनल कम्प्यूटर या लैपटॉप का ही इस्तेमाल करें। जब कभी भी आप अपने इंटरनेट बैंकिंग या किसी भी जरूरी अकाउंट में लॉगिन करें, तो काम खत्म कर अपने अकाउंट को लॉगआउट करना न भूलें और जब आप लॉगिन कर रहें, हो तब इस बात पर जरूर ध्यान दें कि पासवर्ड टाइप करने के बाद कम्प्यूटर द्वारा पूछे जा रहे ऑप्शन रिमेबर पासवर्ड या कीप लॉगिन में क्लिक न करें।

फेक साइट का उपयोग
लोगों को धोखा देने के लिए और अपनी चंगुल में फंसाने के लिए अधिकतर स्कैमर्स (घोटाले बाज) फेक साइट प्रयोग में ला रहे हैं। फेक साइट के नाम से ही प्रतीत हो जाता है कि यह एक झूठी वेबसाइट है। ऑनलाइन ख़रीदारी या कोई भी   लेन-देन करने के लिए जैसे ही आप यहां अपने क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग का यूजर नेम, लॉगिन पासवर्ड ट्रांजिक्सन पासवर्ड या ओटीपी इंटर करते हैं, तो वो इस डिटेल्स को कॉपी कर लेता है। इसलिए ओटीपी किसी को न दें। 

स्ट्रांग पासवर्ड रखना चाहिए
हमेशा बहुत स्ट्रांग पासवर्ड का प्रयोग करें, जिससे आसानी से किसी को पता न चले। अपना पासवर्ड कभी भी अपने नाम, पता, गली नंबर, जन्म तिथि, परिवार के सदस्यों के नाम, विद्यालय के नाम या अपने वाहनों के नंबर पर न बनाएं। कभी भी आप अपने बैंकिंग यूजर नेम, लॉगिन पासवर्ड, ट्रांजिक्शन पासवर्ड,  ओ. टी.पी, गोपनीय प्रश्नों या गोपनीय उत्तर को अपने मोबाइल, नोटबुक, डायरी, लैपटॉप या किसी कागज पर न लिखें, हमेशा आप ऐसा पासवर्ड सेट करें, जो की आपको आसानी से याद रहे और आपको इसे कहीं लिखने की आवश्यकता न पड़े। 

इस प्रकार की हो रही ठगी 
सूत्रों ने बताया कि सोशल मीडिया पर फेसबुक, जॉब, कर्ज, गिफ्ट लगने के संदेश, बैंक एटीएम, बोनस मिलने, वाहन इनाम में लगने आदि प्रकार का प्रलोभन देकर नागरिकों के साथ ठगी की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि झारखंड के जमतारा क्षेत्र के युवा ज्यादातर ऑनलाइन व सोशल मीडिया की ठगी में लिप्त हैं। पिछले वर्ष साइबर सेल पुलिस का एक दल कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया था।  इसी तरह अहमदनगर के नगर क्षेत्र से नागपुर साइबर सेल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर नागपुर लाया था। यह आरोपी कई लोगों के डाटा को हैक कर एक बीमा कंपनी को बेच दिया था। बीमा कंपनी ने कई लोगों के साथ ऑनलाइन ठगी की थी। 

सतर्क रहने की जरूरत 
साइबर अपराध रोकने के लिए नागरिकों को खुद सतर्क रहने की जरूरत है। फेसबुक पर अपने परिवार के बारे में जानकारी शेयर न करें। लोग अपने परिवार की तस्वीरों से लेकर वह तमाम जानकारियों को शेयर कर देते हैं, जिसका फायदा हैकर उठाते हैं। साइबर अपराध में फेसबुक, लॉटरी लगने, बैंक से कर्ज दिलाने, अश्लील तस्वीरें भेजने जैसे मामले बढ़ने के कारण हैं कि लाेग बिना कुछ सोचे समझे अपने नंबर शेयर कर देते हैं। इससे बचने का आसान तरीका है। अपनी ओटीपी को किसी के साथ शेयर न करें। हर सोशल मीडिया की एक ओटीपी होती है। कुछ लोग इसके बारे में ज्यादा गंभीर नहीं रहते हैं। वह किसी के साथ इसे शेयर कर देते हैं, जिसका फायदा शातिर दिमाग वाले उठाते हैं। किसी अपरिचित व्यक्ति से व्यवहार करते समय उसके बारे में मालूमात हासिल कर लें, हो सके तो अपरिचित व्यक्ति से अधिक संपर्क न बढ़ाएं। - विशाल माने, एपीआई, साइबर सेल पुलिस विभाग नागपुर शहर
 

खबरें और भी हैं...