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अब गर्मी में राहत देगी ग्रीन बिल्डिंग : एसी, कूलर का उपयोग होगा कम

February 25th, 2019 11:51 IST
अब गर्मी में राहत देगी ग्रीन बिल्डिंग : एसी, कूलर का उपयोग होगा कम

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अब गर्मी में राहत देने के लिए ग्रीन बिल्डिंग बनाई जाएगी। इस बिल्डिंग के बनने से एसी.कूलर का उपयोग भी कम होगा। जी हां, स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत शहर में अनेक विकासकार्य जारी हैं। नागपुर स्मार्ट सिटी के अंतर्गत बिल्डिंग एफिशियंसी एक्सलेरटर प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य शहर की महत्वपूर्ण इमारताें और बनने वाली इमारतों को ऊर्जा संरक्षण के रूप में विकसित करना है। विदेशों में यह अवधारणा बहुत पहले ही आ गई थी। भारत में भी कई शहरों में इस अवधारणा के आधार पर विकासकार्य जारी है। नागपुर शहर में एक वर्ष तक इमारतों का विश्लेषण कर जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उसी के आधार पर भविष्य में होने वाले सभी निर्माण होंगे।

स्मार्ट सिटी में ग्रीन बिल्डिंग संकल्पना को प्रोत्साहित करने और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए बिल्डिंग एफिशियंसी एक्सलरेटर प्राेजेक्ट शुरू किया गया है। इसके लिए नागपुर महानगरपालिका, नागपुर स्मार्ट एंड सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (एनएसएससीडीसीएल), वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई), इंटरनेशनल काउंसिल फाॅर लोकल इन्वायरमेंटल इनिशिएटिव्स (आईसीएलइआई- लोकल गवर्नमेंट) द्वारा एक एमओयू साइन किया गया है। यह एमओयू एक वर्ष के लिए होगा। इस वर्ष नागपुर शहर के हर क्षेत्र से महत्वपूर्ण इमारतों को चुना गया है। इमारतों के शोध, विश्लेषण, निरीक्षण और जांच रिपोर्ट में होने वाला खर्च संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं द्वारा दिया जाएगा। निरीक्षण में यह जांच की जाएगी कि इमारत की आधार संरचना की क्या स्थिति है और वह कैसी हो सकती है। इसके लिए एक टीम भी बनाई गई है, जो आधुनिक सॉफ्टवेयर और उपकरणों से हर महत्वपूर्ण और प्रधान इमारतों का निरीक्षण करेगी। इसके लिए हर श्रेणी की एक इमारत को चुना गया है, जिसमें अस्पताल, सरकारी दफ्तर, खेल, रहवासी और मॉल्स शामिल है। हर प्रोजेक्ट में संयुक्त राष्ट्र की दो संस्थाओं ने भी एमओयू साइन किया है। यह संस्थाएं संयुक्त राष्ट्र की हैं और यह 43 देशों के साथ काम करती हैं। 

ऐसा होता है बिल्डिंग एफिशियंसी एक्सलरेटर
शहर में हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी इमारतें बनी हुई हैं और इन इमारतों में सबसे ज्यादा बिजली की खपत और अन्य खर्च होता है। बिल्डिंग एफिशियंसी में इन इमारतों की आधार संरचना ऐसी तैयार की जाती है, जिससे इनमें होने वाले हर खर्च में कमी होती है। आमतौर पर नागपुर शहर में गर्मी में सबसे ज्यादा बिजली की खपत होती है। ऐसे कई शहर और देश हैं, जहांं का मौसम बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा होता है, लेकिन वहां पर बिल्डिंग एफिशियंसी अच्छी होने के कारण वहां पर बिजली की खपत कम होती है। इसका कारण है इमारत की आधार संरचना। इमारत की संरचना केवल जगह या डिजाइन को देखकर नहीं होती। इसके लिए सन पाथ और मौसम का ध्यान भी रखना होता है। ग्रीन बिल्डिंग की संरचना में सोलर, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और सभी तत्वों का ध्यान रखा जाता है। इससे नागपुर शहर में भी गर्मी में एसी, कूलर का उपयोग कम होगा।

गाइड बुक होगी तैयार
बिल्डिंग एफिशियंसी के बारे में सभी को जानकारी नहीं है। इस प्रोजेक्ट में होने वाली शोध अौर उनके परिणामों को देखते हुए इसके उपयाेग की एक गाइड बुक तैयार की जाएगी। यदि कोई आम आदमी भी अपना मकान या बिल्डिंग बनवा रहा है तो वह इस बुक की सहायता लेकर ग्रीन बिल्डिंग बना सकता है। इसके उपयोग के लिए सरल भाषा में इसकी सभी जानकारी दी जाएगी। फिल्हाल एक वर्ष तक इसके आधार पर निर्माण नहीं होंगे, लेकिन गाइड यह प्रोजेक्ट पूरा होते ही विकासकार्य शुरू होगा। -- देवेंद्र महाजन, जनरल मैनेजर, पर्यावरण विभाग, स्मार्ट सिटी एंड सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड

रिपोर्ट के बाद शुरू होगा निर्माण
हम दुबई की इमारतों के आधार पर नागपुर में कार्य नहीं कर सकते, क्योंकि हर देश और क्षेत्र का मौसम एक जैसा नहीं होता है। इसीलिए शहर की कुछ इमारतों को चुन कर उन पर शोध और विश्लेषण करेंगे। उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार होगी और फिर उसके आधार पर ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण शुरू करेंगे।  -शार्दूल अरविंद वेणेगुरकर, प्रोजेक्ट ऑफिसर, आईसीएलईआई 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।