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बिजली के बढ़े हुए बिल पर महावितरण व राज्य सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस    

बिजली के बढ़े हुए बिल पर महावितरण व राज्य सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस    

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बिजली के बढ़े हुए  बिल को लेकर पूर्व नगरसेवक जनार्दन मून की ओर से दायर जनहित याचिका पर  बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता ने औरंगाबाद खंडपीठ का आदेश प्रस्तुत करके यह साबित किया कि इन दोनों मामलों में विषय अलग-अलग हैं। इसके बाद न्या. सुनील शुक्रे और न्या. नितीन सूर्यवंशी की पीठ के समक्ष युक्तिवाद शुरू हुआ। महावितरण की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता श्रीधर पुरोहित ने महावितरण द्वारा लोगों को भेजे गए बिल को सही करार देते हुए उसका गणित समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ। अंतत: कोर्ट ने महावितरण और प्रदेश ऊर्जा मंत्रालय को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से एड. अश्विन इंगोले ने पक्ष रखा। 

यह है मामला
याचिकाकर्ता का दावा है कि महावितरण ने बहुत ज्यादा बिल भेजा है। मार्च माह से उपभोक्ताओं के मीटर की रीडिंग नहीं ली गई और औसत को आधार बनाते हुए बिल भेजा जा रहा है।  महावितरण जिन दरों पर औसत बिल भेज रही है, वह बहुत ज्यादा है। महावितरण महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग की ओर से निर्धारित स्लैब के अनुसार बिलिंग करे तो राशि कम हो जाएगी। कई मामलों में तो बिल आधा हो जाएगा। याचिकाकर्ता ने इस मामले में एमएसईबी को शिकायत की और एमईआरसी द्वारा निर्धारित स्लैब के अनुसार बिल भेजने का अनुरोध किया। आरोप है कि इसका संज्ञान नहीं लिया गया। प्रदेश भर के उपभोक्ताओं की ऐसी ही शिकायतें हैं। अब मामला कोर्ट में विचाराधीन है। 

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