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हिन्दी दिवस  : गूगल से लेकर फेसबुक, वाट्सएप और अन्य मीडिया मंचों पर भी हिन्दी का बोलबाला

हिन्दी दिवस  : गूगल से लेकर फेसबुक, वाट्सएप और अन्य मीडिया मंचों पर भी हिन्दी का बोलबाला

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  आज हिन्दी दिवस है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मान्यता दी गई। वक्त के साथ हिन्दी भाषा ने भी खुद को नए कलेवर में ढाला। कई बाहरी शब्दों को हिन्दी के शब्दों के रूप में ही गिना जाने लगा। गूगल से लेकर फेसबुक, वाट्सएप और अन्य मीडिया मंचों को भी हिन्दी खूब जंची और उन्होंने हिन्दी भाषा को अपने यहां मुख्य स्थान दिया। मौजूदा वक्त में हिन्दी भाषा की स्थिति और इसके विकास की जरूरत पर कर्मचारी राज्य बीमा निगम के वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी डॉ.जय प्रकाश ने प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के मुख्य न्यायाधीश ने बीते दिनों राजभाषा अधिनियम 1963 में संशोधन पर जोर दिया था। उनकी राय थी कि हमारे प्रशासनिक कामकाज में अंग्रेजी की जगह हिन्दी व अन्य भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

ऐसे बढ़ेगी हिंदी की प्रतिष्ठा
डॉ.जय प्रकाश भी इससे सहमत हैं। वे मानते हैं कि सरकारी कार्यालय अपने सर्कुलर, निर्देश, टेंडर, लाइसेंस यदि हिंदी और स्थानीय भाषा में प्रकाशित करें तो इससे हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं का विकास होगा। वे नई शिक्षा नीति को हिंदी के लिए संजीवनी मानते हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति में हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं में शिक्षा के प्रावधान से हिंदी व अन्य भाषाओं का विकास होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय जहां गूगल व अन्य टेक्नोलॉजी ने हिंदी को अपनाया है। यूनिकोड से हिंदी टाइपिंग व सर्चिंग आसान हो गई है। यह समय शिक्षा संस्थाओं में युवाओं के बीच हिंदी को और प्रचलित बनाने के लिए एकदम सटीक है। जरूरी बदलाव अमल में लाने से हिंदी की प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ाने में सफलता मिलेगी। 

हिंदुस्तान में ही हिन्दी मांग रही स्थान...
यह विडंबना ही है कि जिस देवनागरी लिपि को कम्प्यूटर के लिए आरंभ में उचित नहीं माना गया, वही देवनागरी लिपि बाद में कम्प्यूटर के लिए सबसे उत्तम व वैज्ञानिक लिपि सिद्ध हुई है। पूरे विश्व ने तो हिन्दी के महत्त्व को स्वीकार किया, लेकिन भारत में आजादी के इतने वर्षों बाद भी हिंदी अपना स्थान मांग रही है। 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।