दैनिक भास्कर हिंदी: पति है या तानाशाह... ‘बोर्ड’ पर लिखा सारा काम समय पर नहीं हुआ तो पत्नी से गालीगलौच व मारपीट

August 3rd, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शादी के बाद गांव से शहर आए एक व्यक्ति ने हद कर दी। पत्नी को प्रताड़ित करने के लिए उसने अजीबोगरीब तरीका अपनाया। शाम को ऑफिस से आने के बाद वह बाकायदा एक सूची तैयार करता था। इसमें अगले पूरे दिन के काम का ब्योरा होता था। मसलन, सुबह 8 बजे नाश्ता, 9 बजे झाडू-पोंछा,10 बजे बर्तन धोना, 11 बजे खाना बनाना, आदि-आदि। पूरे दिन के काम की सूची वह एक बोर्ड पर लिख देता था। अगर उसके अनुसार, काम नहीं हुआ तो पत्नी की शामत आ जाती थी। गाली-गलौज और मारपीट इसका दंड होता था। शादी के सवा दो वर्ष में पत्नी अजीज  आ चुकी थी। पति का बर्ताव वह सहन नहीं कर पा रही थी। अपने माता-पिता से उसने इसकी शिकायत की। माता-पिता अपनी बेटी को लेकर नंदनवन स्थित अनसुया बाई काले समुदेशन केन्द्र पहंुचे और पति की शिकायत की।

पति ने कहा- मैं अनुशासित
सवा दो वर्ष पहले अमित (बदला हुआ नाम) का विवाह अमिता (बदला हुआ नाम) से हुआ। विवाह के बाद से ही पति ने अपना हुकूम चलाना शुरू कर दिया। पति का कहना है कि वह बहुत ही अनुशासित है। पत्नी कुछ समय तक तो उसके हर आदेश का पालन करती रही। रोज की पिटाई से वह आहत होने लगी। थोड़ी सी चूक मतलब गाली-गलौज और पिटाई। पत्नी को समझ में आ गया कि उसका पति ‘साइको’ है। हद तो तब हो गई, जब अमित ने अमिता  को गांव में अपने माता-पिता के साथ रहने को कहा। अमित का कहना है कि जब तक पूरी कामकाज नहीं सीख जाती, तब तक मेरे साथ नहीं रहना। साथ ही उसने अमिता से उसके पिता से व्यापार शुरू करने के लिए 2 लाख रुपए की मांग करने को कहा। अमिता ने जब इस बात से इनकार किया तो मारपीट करने लगा। अंतत: अमित को छोड़कर वह मायके आ गई। 

समझाइश के बाद भी साथ रखने को तैयार नहीं
अनसुया बाई काले समुदेशन केन्द्र की संचालक शालिनी सक्सेना ने बताया कि लगभग 5 माह पूर्व यह मामला समुदेशन केन्द्र में आया। हमने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी, लेकिन पति साइको किस्म का व्यक्ति है, वो अपनी बात पर अडिग है। उसका कहना है कि पत्नी उसके कहे अनुसार काम पूरे नहीं कर पाती। इसलिए वो उसके साथ रहने को तैयार नहीं है। उसका कहना है कि अमिता को गांव में माता-पिता के साथ ही रहना होगा। श्रीमती सक्सेना ने बताया कि समुदेशन केन्द्र में आए किसी भी मामले में हम दोनों पक्षों को समझाते हैं, ताकि परिवार बना रहे। कई मामलो में तो सुलह हो जाती है, लेकिन कई बार छोटे-छोटे कारणों से परिवार बिखर भी जाते हैं। 

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