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कम उम्र में स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि, जागरूकता जरूरी

कम उम्र में स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि, जागरूकता जरूरी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। युवा महिलाओं में स्तन कैंसर की शिकायत दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह बिमारी के 50 प्रतिशत मरीज 50 वर्ष से कम आयु की महिलाएं हैं। 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग में इस ​बिमारी का प्रकोप सबसे ज्यादा है। विकसित देशों के मुकाबले में भारत में स्तन कैंसर के कारण हाेने वाली मौत की संख्या काफी अधिक है। बीमारी की पहचान के बाद मृत्यु दर 50 फीसदी है।

आंकोलॉजिस्ट डॉ. सुशील मानधनिया के अनुसार इसका सबसे प्रमुख कारण बीमारी की देर से पहचान है। उन्होंने कहा कि 10 विषय में समय पर जांच काफी मददगार साबित हो सकती है। इसके लिए जागरूकता बढ़ाए जाने की जरूरत है। डॉ. मानधनिया स्तन कैंसर जागरूकता माह में इस विषय पर लोगों तक जानकारी पहुंचाए जाने के साथ-साथ कैंसर को नोटिफाइंग बीमारी में शामिल किए जाने की जरूरत बताई।

हर 22 में एक महिला को स्तन कैंसर का खतरा

देश में हर 22 महिला में से एक महिला को स्तन कैंसर होने का खतरा है। यह खतरा विकसित देशों में कई गुणा ज्यादा है। अमेरिका में हर आठ महिला में एक महिला को यह खतरा है। नागपुर स्थित राष्ट्र संत तुकड़ोजी क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल के आकड़ों के अनुसार देश में 40 से 50 वर्ष के आयु वर्ग में 29.3 प्रतिशत महिलाओं की मौत का कारण स्तन कैंसर है। नागपुर में भी स्थित कमोबेश ऐसी ही है।

आधुनिक जीवनशैली बढ़ा रहा खतरा

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार देश के शहरों में तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण स्तन कैंसर को खतरा बढ़ रहा है। देर से शादी और कम बच्चों के कारण भारतीय महिलाओं में इस प्रकार के कैंसर का प्रमाण तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं की तुलना में शहरी महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले ज्यादा है जबकि ग्रामीण महिलाओं में स्वाइकल कैंसर के मामले ज्यादा हैं।
 
पुरुषों में भी स्तन कैंसर

नागपुर में एक कैंसर अस्पताल में पिछले एक वर्ष में पुरुषों में कैंसर के सात मामले दर्ज हुए हैं। आम तौर महिलाओं को होने वाली बीमारी माना जाने वाला स्तन कैंसर पुरुषों को भी हो सकता है। मोटापा और शराब की आदत को पुरुषों में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।  

सक्रियता कम कर सकती है खतरा

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार नियमित रूप से शारीरिक सक्रियता, वजन पर नियंत्रण, अल्कोहल से दूरी और मेनोपॉज के बाद हॉर्माेन थैरेपी से बचने से स्तन कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।

नागपुर में स्तन कैंसर के मरीज

वर्ष          संख्या
2012       386
2013       452
2014       432
2015       475
2016        440

(यह संख्या केवल राष्ट्र संत तुकड़ोजी क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल की है)

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।