दैनिक भास्कर हिंदी: महात्मा गांधी ने 85 साल पहले बनवाया था ये ऐतिहासिक कुआं, आज क्यों है दिलों से दूर?

August 15th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। भारत देश अपने 72वें स्वतंत्रता दिवस के रंग में रंगा हुआ है। चारों और लोग खुशियों के रंग बिखेरते हुए मिठाइयां बांट रहे हैं। वर्तमान भारत में लोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बातों को दिलों में जगाए हुए हैं और जात-पात, ऊंच-नीच भूलकर एक दूसरे को गले लगाकर शुभकामनाएं दे रहे हैं। इन सबके बावजूद महात्मा गांधी द्वारा बनवाया गया एक कुंआ आज भी लोगों के दिलों से दूर होता दिख रहा है। गांधी जी ने यह कुंआ महाराष्ट्र के नागपुर शहर में एक खास उद्देश्य से बनाया था।

जानकारी के अनुसार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इमामवाड़ा के बारा सिग्नल एरिया में खास मकसद के तहत वर्ष 1933 में एक कुआं बनवाया था और वह मकसद था छुआछूत दूर करना। आज वह मनपा प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है। यह ऐतिहासिक गांधी कुआं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र में आता है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सौंदर्यीकरण हुआ पर टाइल्स उखड़ने लगी है।

गवाह है इतिहास
सुदर्शन समाज के लोगों को नहाने के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। तत्कालीन कांग्रेसी नेता पूनमचंद राकां ने इसके लिए भरपूर योगदान दिया। पत्नी की सोने की चूड़ियां बेचकर आर्थिक सहयोग किया। महात्मा गांधी, पूनमचंद राका व जंगलुजी बढेल ने श्रमदान कर 8 नवंबर 1933 को इस कुएं का निर्माण किया। महात्मा गांधी ने खुद सुदर्शन समाज के बच्चों को यहां नहलाया था।

भोला बढ़ेल, पूर्व विधायक के मुताबिक महात्मा गांधी ने इस जगह कुआं बनाकर सुदर्शन समाज में स्वच्छता का संदेश दिया था। छुआ-छूत को भी दूर करने की कोशिश की थी। आज यह उपेक्षित है। कुए में गटर का पानी मिल गया है। फव्वारे बंद हो चुके हैं। नियमित सफाई नहीं हो रही। हेरिटेज सूची में इसे डालना चाहिए, ताकि इसका उद्धार हो सके।

कुएं की सफाई होगी 
नीता काले, सहायक आयुक्त, धंतोली जोन, मनपा का कहना है कि इस ऐतिहासिक कुएं की नियमित सफाई होगी। गटर का पानी इसमें न मिले, इसके लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। कुआं के आस-पास कोई कचरा न डाले, इसका भी ध्यान रखा जाएगा।

यह है स्थिति

  • -नियमित सफाई नहीं होने से कुएं के आसपास कचरा पड़ा रहता है। 
  • -गटर का पानी मिलने से कुएं का पानी इस्तेमाल लायक नहीं रहा 
  • -गटर लाइन हटाने की मांग अनेकों बार हुई, लेकिन दुर्दशा बनी हुई है।