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कर्मचारियों के बैंक खाते-आधार का विवरण ईपीएफओ को देना जरूरी

कर्मचारियों के बैंक खाते-आधार का विवरण ईपीएफओ को देना जरूरी

हाईलाइट

  • कोर्ट ने कहा धार कार्ड व बैंक खाते से जुड़ी जानकारी देना कर्मचारियों के हित में
  • ईपीएफओ ने कंपनी के खिलाफ मुंबई के एक मैजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत की

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कर्मचारी भविष्य निधी कार्यालय (ईपीएफओ) ने बांबे हाईकोर्ट में दावा किया है कि यदि कर्मचारी आधार कार्ड व बैंक खाते से जुड़ी जानकारी नहीं देने से परेशानी बढ़ेगी। हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर ईपीएफ कार्यालय ने कहा है कि आधार कार्ड व बैंक खाते से जुड़ी जानकारी देना कर्मचारियों के हित में है। इससे सीधे उनके खाते में पीएफ की राशि व पेंशन से जुड़े लाभ के अलावा सरकार की ओर से दी जानेवाली रियायत रकम जमा की जा सकेगी। 

ईपीएफओ में सहायक आयुक्त के तौर पर कार्यरत अधिकारी ने जानी-मानी कंपनी जेपी मार्गन सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका का विरोध करते हुए यह हलफनामा दायर किया है। दरअसल कंपनी ने अपने कर्मचारियों के आधार कार्ड व बैंक से जुड़ी जानकारी ईपीएफओ को नहीं दी है। लिहाजा ईपीएफओ ने कंपनी के खिलाफ मुंबई के एक मैजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत की है। जिसे रद्द करने की मांग को लेकर कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। 

याचिका में मांग की गई है कि आधारकार्ड व बैंक से जुड़ी जानकारी देने की बाध्यता को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के विपरीत घोषित किया जाए।  यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधारकार्ड के संबंध में सितंबर 2018 में दिए गए फैसले के  खिलाफ है। कंपनी ने याचिका में दावा किया है कि कर्मचारी अपने आधारकार्ड व बैंक से जुड़ी जानकारी नहीं दे रहे हैं, इसलिए कंपनी ईपीएफओ में कर्मचारियों के आधारकार्ड व बैंक से जुड़ा ब्यौरा देने में विफल रही है। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कंपनी के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत पर कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कंपनी को अंतरिम राहत प्रदान की थी और ईपीएफओ को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।      

ईपीएफओ के अधिकारी ने हलफनामे में साफ किया है कि कंपनी के आधे कर्मचारियों ने अपने आधार कार्ड व बैंक से जुड़ी जानकारी दी है। इस लिहाज से देखा जाए तो कंपनी खुद इस बात से सहमत है कि आधार कार्ड जमा करने से जुड़ा नियम सही है। हलफनामे में कहा गया है कि देश में किसी भी कंपनी ने कर्मचारियों के आधार कार्ड व बैंक के खाते से जुड़ी जानकारी देने में आपत्ति नहीं जताई है। जहां तक बात सुप्रीम कोर्ट के आधार कार्ड से जुड़े फैसले की है तो सुप्रीम कोर्ट ने पीएफ के लिए आधार कार्ड जमा करने से छूट नहीं दी है। इसलिए याचिका में की गई मांग पर विचार न किया जाए। न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति एनजे जमादार की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि उन्हें ईपीएफ की ओर से दिए हलफनामे के अध्ययन के लिए समय दिया जाए। इसके बाद खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 25 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी और कंपनी को मिली अंतरिम राहत को बरकरार रखा।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।