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सुसाइड नोट में नाम होना काफी नहीं, गलत मंशा भी सिद्ध होनी चाहिए

सुसाइड नोट में नाम होना काफी नहीं, गलत मंशा भी सिद्ध होनी चाहिए

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कल्पेश वर्मा नामक युवक को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी वाशिम जिले के रिसोड नगर परिषद के तत्कालीन मुख्याधिकारी सुधाकर पानझाडे, नगरसेविका मीना अग्रवाल, उनके पति अशोक अग्रवाल व सुनील बागड़िया नामक व्यवसायी को बरी किया है। कल्पेश के भाई की शिकायत पर रिसोड थाने में आरोपियों के खिलाफ 10 अप्रैल 2016 को भादवि 306, 120-बी, 477-सी व 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने यह माना कि आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में किसी व्यक्ति को तब ही सजा दी जा सकती है, जब उसकी गलत मंशा सिद्ध की जा सके। केवल सुसाइड नोट में किसी व्यक्ति का नाम आना ही काफी नहीं है। दरअसल, कल्पेश के परिवार के पास क्षेत्र में 327 वर्ग मीटर जमीन है। यहां बने निर्माणकार्य को अवैध बता कर इसे गिराने के लिए नप ने कल्पेश के पिता को नोटिस भेजा था। वर्मा परिवार और प्रशासन का यह विवाद दीवानी न्यायालय में भी पहुंचा था। 7 अप्रैल को कल्पेश ने आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उसने आरोपियों के नाम लिखे थे।

जमीन का आधा हिस्सा मांग कर दबाव बनाने का आरोप
कल्पेश के परिवार ने आरोप लगाया कि अपने पद की धौंस दिखाकर कल्पेश से जमीन में आधा हिस्सा मांगा गया था। इसके कारण तनाव में आकर कल्पेश ने आत्महत्या कर ली थी। इस प्रकरण में कोर्ट ने माना कि सुसाइड नोट या किसी भी अन्य प्रकार से पीड़ित परिवार यह सिद्ध नहीं कर पाया कि आरोपी अधिकारी-पदाधिकारियों ने कल्पेश को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई या प्रताड़ित किया। मामले में सभी पक्षों को सुनकर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर दर्ज एफआईआर खारिज करने के आदेश जारी किए हैं। 

10 को पेश किया गया था न्यायालय में
पुलिस ने मामला दर्ज कर मो. तनवीर, जीशान खान को गिरफ्तार कर 10 नवंबर काे न्यायालय में पेश किया था। दोनों का 16 नवंबर तक पुलिस रिमांड मिला था। इस दौरान 15 नवंबर को इनसे मिली जानकारी के आधार पर उमैरुद्दीन फैजुद्दीन अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया। तीनों को पुलिस ने 16 नवंबर को न्यायालय में पेश कर 5 दिन का रिमांड लिया। तीनों को अब 20 नवंबर को न्यायालय में पेश किया जाएगा। कार्रवाई जोन क्रमांक-5 के पुलिस उपायुक्त निलोत्पल, कार्यवाहक सहायक पुलिस आयुक्त कार्यकर्ता के मार्गदर्शन में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष बाकल, द्वितीय पुलिस निरीक्षक राधेलाल पाल के आदेश पर सहायक पुलिस निरीक्षक सुरेश कन्नाके आदि ने की।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।