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जंगल सफारी, एक जिप्सी में 6 पर्यटक ही रहेंगे, 26 के पहले फैसला संभव

जंगल सफारी, एक जिप्सी में 6 पर्यटक ही रहेंगे, 26 के पहले फैसला संभव

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  जंगल सफारी के दौरान एक जिप्सी में 6 लोगों के सवार होने की अनुमति मिल सकती है। जनप्रतिनिधियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन पर वनमंत्री ने उचित आश्वासन और योग्य कार्रवाई के दिशा-निर्देश विभाग को दिए हैं। अधिकारियों की मानें तो 26 जनवरी के पहले ही इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। 

सफारी की व्यवस्था इन जंगलों में
राज्य की कुल 307.58 लाख हेक्टेयर जमीन अंतर्गत 16.9 लाख हेक्टेयर में वन क्षेत्र फैला है। रिपोर्ट के अनुसार 61 हजार 724 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मेें यह जंगल है। इसमें कोर इलाकों के अलावा 6 व्याघ्र प्रकल्प हैं, जिसमें मेडघाट, ताड़ोबा अंधारी, पेंच, सह्याद्री, बोर, नवेगांव-नागझिरा आदि शामिल हैं। केवल विदर्भ की बात करें तो पेंच, ताड़ोबा, बोर, मेलघाट जैसे जंगल क्षेत्र यहां आते हैं। यहां बड़ी संख्या में वन्यजीवों का वास है, जिसमें बाघ भी शामिल हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा को बनाए रखते हुए यहां पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जंगल सफारी की भी व्यवस्था है। इससे एक ओर सैलानियों को जंगली क्षेत्र में घूमने का मजा मिलता है, तो दूसरी ओर वन विभाग का राजस्व भी बढ़ता जाता है। 

फिलहाल काफी महंगा 
कोरोना महामारी के कारण गत वर्ष मार्च माह से इसे बंद कर दिया गया था। अनलॉक में नए दिशा-निर्देश के तहत इसे शुरू किया गया है। मगर एक जिप्सी में केवल 4 पर्यटक एक गाइड व एक ड्राइवर को ही अनुमति दी गई है। इस व्यवस्था से पर्यटकों के लिए जंगल सफारी महंगी साबित हो रही है। एक जिप्सी का किराया 6 हजार रहने से यदि किसी परिवार में या एक ग्रुप में 5 या 6 लोग हैं, तो उन्हें दो जिप्सी लेना पड़ रहा है और इस कारण अधिक खर्च हो रहा है। 

उचित फैसले का आश्वासन 
ऐसे में नियमों का पालन करते हुए एक जिप्सी में 6 पर्यटकों को घूमने की अनुमति मिलने की मांग जोर पकड़ने लगी। हाल ही में इस संदर्भ में सांसद कृपाल तुमाने, विधायक आशीष जैस्वाल, मनीषा कायंदे व जिप्सी संगठनों के पदाधिकारियों ने वनमंत्री संजय राठोड़ को निवेदन सौंपकर सभी व्याघ्र प्रकल्प में एक जिप्सी में 4 की जगह 6 पर्यटकों को ले जाने की अनुमति देने की मांग की गई है। वनमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को योग्य कार्रवाई करने के लिए कहा है।
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विचार जारी है
जनप्रतिनिधियों द्वारा इस संदर्भ में ज्ञापन मिला है। जिसे लेकर विचार चल रहा है। यदि ऐसा करना संभव होगा, तो जल्द ही इस व्यवस्था को लागू भी किया जाएगा।
- नितीन काकोडकर, पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ), वन विभाग महाराष्ट्र राज्य नागपुर

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।