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कोरोना से निपटने महाराष्ट्र में भी लागू हो केरल मॉडल

कोरोना से निपटने महाराष्ट्र में भी लागू हो केरल मॉडल

डिजिटल डे्स्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में कोरोना संक्रमण पर केंद्रित जनहित याचिका  में महाराष्ट्र में केरल मॉडल लागू करने की गुजारिश की गई है।  याचिकाकर्ता सुभाष झनवर के वकील राम हेडा ने कोर्ट में अर्जी दायर की है। 

उन्होंने दलील दी है कि भारत में कोरोना के दाखिल होने पर केरल और महाराष्ट्र में सर्वाधिक मामले पाए गए थे। केरल ने बेहतर नीतियों के कारण रिकवरी रेट बढ़ा कर कोरोना पर काबू पा लिया, वहीं महाराष्ट्र अभी भी इस संकट से जूझ रहा है। केरल में रिकवरी रेट 74 प्रतिशत है, तो महाराष्ट्र में 14.5 प्रतिशत। केरल में मृत्यु दर भी सबसे कम है। वहां सर्वाधिक जांचें हुईं। प्लाजमा थेरेपी भी केरल में सबसे पहले शुरू हुई। केरल के हर जिले में कम से कम दो कोविड-19 अस्पताल बनाए गए, 14 दिन नहीं बल्कि 28 दिन का होम क्वारंटाइन का नियम लागू किया गया।  इसी तरह प्रवासी मजदूरों के लिए  भोजन व अन्य सुविधाएं दी गईं।

 याचिकाकर्ता के अनुसार भारत में केरल मॉडल सबसे आदर्श मॉडल है, यदि महाराष्ट्र में भी इस प्रकार के प्रबंध किए गए तो जल्दी ही कोरोना पर काबू पाया जा सकता है। राज्य सरकार ने इसके जवाब में कोर्ट में तर्क दिया है कि केरल के मुकाबले महाराष्ट्र की भौगोलिक स्थिति, कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या और अन्य परिस्थितियां अलग हैं। इससे निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों का पालन कर रही है। कोरोना से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। ऐसे में याचिकाकर्ता की मांग फिलहाल नहीं मानी जा सकती हैं। 

सुनवाई  कल
अर्जी में याचिकाकर्ता ने कोरोना संदिग्धों को होम क्वारंटाइन करके उनकी इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट टैगिंग के जरिए निगरानी करने का भी मामला रखा। तर्क दिया है कि अमेरिका, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और दुबई जैसे देशों में इसी तरीके से संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है। नागपुर और राज्य में संचालित संस्थागत क्वारंटाइन सेंटर अब भरते जा रहे हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को रखी गई है।

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