दैनिक भास्कर हिंदी: फिर कुएं में गिरा तेंदुआ, बिना बेहोश किये खटिया डालकर बाहर निकाला 

February 8th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  शुक्रवार की सुबह एक तेंदुआ खेत के कुएं में गिर गया। गांववालों को पता चलने पर इसकी जानकारी वन अधिकारी को दी। जिसके बाद नागपुर के ट्रान्सिक ट्रीटमेंट सेंटर से एक टीम यहां पहुंची। टीम ने तेंदुए को बिना बेहोश किये, खटिये के सहारे बाहर निकालने में सफलता पाई।  प्राथमिक उपचार के बाद  तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया गया  है। रेस्क्यू  टीम में डॉ. अंकुश दुबे, डॉ. सैयद बिलाल, वनपाल जामगडे, वनरक्षक डीबी बोरकर, एस.पी कुइटे, पीके सुर्यवंशी आदि प्रमुखता से शामिल थे। कार्रवाई मुख्य वनसंरक्षक पी. कल्याण कुमार, उपवनसंरक्षक डॉ. प्रभुनाश शुक्ला, मानद वन्यजीव रक्षक कुंदन हाथे के मार्गदर्शन में की गई। बता दें कि इसी तरह की घटना विगत दिनों  नरखेड़ वनपरीक्षेत्र अंतर्गत हिवरमठ गांव में हुई थी। लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आने से वन्यजीवों के लिए खेत में बने खुले कुएं किसी संकट से कम नहीं है।

कुएं से आ रही थी दहाड़ने की आवाज
जानकारी के अनुसार सुबह के वक्त उपरोक्त वनपरिक्षेत्र अंतर्गत आनेवाले चारगांव में एक किसान के खेत में बने खुले कुएं में दहाडने की आवाज आ रही थी।  लोगों ने पास जाकर देखा तो  कुएं में  तेंदुआ पानी में आधा अंदर डूबा हुआ दिखाई दिया। लोगों ने तुरंत इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी। जिसके बाद एक खटियां को उल्टा कर चारों पैरों पर रस्सी बांधकर कुएं में छोड़ा गया। जिसके बाद तेंदुए के शांत होने तक इंतजार किया गया। धीरे-धीरे खटिये को तेंदुए के पास ले जाते ही तेंदुआ उस पर बैठ गया। जिसके बाद खटिये को बाहर खींचा इस बीच बड़ी ही सावधानी से  तेंदुए को पिंजरे में बंद किया गया। पिंजरे में ही तेंदुए की मेडिकल जांच की गई। सब कुछ ठीक रहने पर तेंदुए को पास ही के जंगल में छोड़ा गया।

क्यों बार-बार कुएं में गिर रहे वन्यजीव
राज्य में कुल 307.58 लाख हेक्टर जमीन अंतर्गत 16.9 लाख हेक्टर जमीन पर वन फैला है। अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार 61 हजार 724 वर्ग किलोमीटर पर जंगल फैला है। जिसमें कोर इलाकों के अलावा 6 व्याघ्र प्रकल्प हैं, मेलघाट, ताडोबा अंधारी, पेंच, सह्याद्री, बोर, नवेगांव-नागझिरा आदि हैं। केवल विदर्भ की बात करें तो पेंच, ताडोबा, बोर, मेलघाट जैसे जंगल क्षेत्र आते हैं। जहां बड़ी संख्या में वन्यजीवों का वास  है। जिसमें बाघ प्रमुखता से शामिल हैं। इन जंगलों के आस-पास कई किसानों की खेती है। जहां वन्यजीवों का रात के अंधेरे में खाने आदि की तलाश में जाना-आना लगा रहता है। जिसमें बाघ, जंगली सुअर, तेंदुआ, लोमडी, हिरण  रहते हैं। खेतों में सिंचाई के लिए कुएं बनाए जाते हैं। कई बार कुआ खुला रहने से रात के अंधेरे में वन्यजीव इसमे गिर कर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।  ऐसे में खेत में बने कुओं को जाली से ढंकना, कुएं का सिरा ऊंचा करना या कुएं के चारों तरफ सुरक्षा इंतजाम करना आदि निर्देश जारी किये थे। लेकिन हर कोई इसे नजरअंदाज करता है फलस्वरुप बार-बार ऐसी घटनाएं होती है।