महामारी की चपेट में मवेशी:   नागपुर जिले की सीमा तक पहुंचा "लम्पी' , पशु संवर्धन विभाग अलर्ट

September 10th, 2022

डिजिटल डेस्क, नागपुर। उत्तर और मध्य भारत के राज्याें में ‘लम्पी’ संक्रमण ने खलबली मचा दी है। यह मवेशियों में होने वाली संक्रामक बीमारी है। मक्खियां, मच्छर और कीटों से मवेशियों में संक्रमण फैलता है। नागपुर जिले की सीमा से सटे अमरावती जिले में ‘लम्पी’ के दस्तक देने से पशु संवर्धन विभाग अलर्ट हो गया है। उसे जिले में पहुंचने से रोकने के लिए उपाय योजना शुरू कर दी गई है। इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर मवेशी को अन्य मवेशी के संपर्क से दूर करने व उसे बांधने के लिए अगल से व्यवस्था करने की पशु संवर्धन खंडारे ने पशु पालकों को सलाह दी है। इस विषय पर पशु पालकों का जनजागरण अभियान शुरू किया गया है। 

गोवंश और भैसों में होता है संक्रमण 
‘लम्पी’ गोवंश आैर भैसों में हाेने वाला संक्रामक त्वचा रोग है। इस बीमारी के विषाणु कैप्रील्पॉक्स वर्ग के हैं। संक्रमित पशु की त्वचा पर कड़क और गोल आकार की गठन आती है। संक्रमण होने पर एक-दो सप्ताह में विषाणु खून में रहता है। उसके बाद शरीर के अन्य हिस्सों में संक्रमण फैलना शुरू होता है। 

बीमारी के लक्षण
संक्रमित पशु की अांख, नाक से स्राव निकलता है। बुखार के अलावा सिर, गर्दन, पैर आदि जगह गांठ, मुंह, हलक व श्वसन नलिका, फेफड़ों में सूजन और जख्म होता है। लार बहने की मात्रा बढ़ना, कमजोरी, भूख नहीं लगना, आंखों में जख्म आदि प्रमुख लक्षण हैं। 

संकरित पशु को ज्यादा खतरा
इस बीमारी से देशी के मुकाबले संकरित पशुओं को ज्यादा खतरा बताया जाता है। जानकारों का मानना है कि बकरी और भेड़ में पाए जाने वाले "देवी' के विषाणु से यह विषाणु मिलता-जुलता है, लेकिन बकरी और भेड़ में यह बीमारी नहीं होती। राहत की बात यह है कि इंसान को इस संक्रमण नहीं है। 

मर रहे मवेशी, प्रशासन नहीं कर रहा पुष्टि
डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर में संदिग्ध बीमारी से जानवरों की मौत हो रही है। आवारा गाय, सुअर और श्वानों की मौत को लेकर अब तक कोई जांच भी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर मृत जानवरों के शव को छिपाने के लिए पेड़ों की आड़ अथवा खुले स्थानों पर डाला जा रहा है। मृत जानवरों की जानकारी मिलने पर मनपा की कचरा संकलन करने वाली एजेंसियां भांडेवाड़ी में पहुंचा रही हैं। कंपनियों का दावा है कि इन जानवरों को डंपिग यार्ड में दफन कर दिया जा रहा है। हैरानी यह है कि मनपा अथवा पशु संवर्धन विभाग से जानवरों की संदिग्ध मौत के कारण की खोज करने तक प्रयास तक नहीं हो रहा है।

‘आशंका’ को प्रशासन कर रहा खारिज
पिछले तीन माह में 50 से अधिक गाय, 60 कुत्ते और 40 सुअरों की मौत हाे चुकी है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान में दुधारू जानवरों में लंपी का प्रकोप हो रहा है। पड़ोसी राज्यों से तस्करी के माध्यम से बड़े पैमाने पर शहर में दुधारु जानवर आते हैं। ऐसे में आशंका है कि ‘लम्पी’ अथवा अज्ञात संक्रामक बीमारी से पशुओं की मौत हो रही हो, लेकिन प्रशासन के अधिकारी इसके प्रभाव को सिरे से खारिज कर रहे हैं। 

मगर हकीकत यह भी है 
पिछले तीन माह में 200 से अधिक जानवरों को भांडेवाड़ी के डंपिग यार्ड में दफनाया गया है, पर मनपा के पशुचिकित्सा विभाग अथवा महाराजबाग पशुचिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने मामले की सुध तक नहीं ली है। 

अब तक पोस्टमार्टम नहीं 
मनपा क्षेत्र में जानवर की संदिग्ध मौत को लेकर पोस्टमार्टम करने का प्रावधान है। मनपा क्षेत्र में पशुओं की जांच एवं उपचार कराने की जिम्मेदारी पशुसवंर्धन विभाग के महाराजबाग चिकित्सालय को दी गई है। संदिग्ध जानवर की मौत के लिए पोस्टमार्टम कराया जाना चाहिए, लेकिन पशुपालक अथवा एनजीओ से शिकायत नहीं मिलने को बहाना बनाकर पोस्टमार्टम नहीं कराया जा रहा। अधिकारियों और चिकित्सकों का दावा है कि दो माह में एक भी संदिग्ध मौत की शिकायत नहीं मिली है। ऐसे में प्रशासन के पास जानवरों की मौत को लेकर कोई भी ठोस तथ्य तक नहीं है।

आक्षेप होने पर ही जांच
अधिकारियों के मुताबिक सभी पशुओं की जांच में पोस्टमार्टम संभव नहीं होता है। ऐसे में पशुचिकित्सा अस्पताल में संदिग्ध मौत वाले जानवर पर प्राथमिक जांच में ‘लम्पी’ का प्रभाव दिखाई देने पर ही नमूने संकलित करते है। नमूनों जांच के लिए पुणे स्थित रोग जांच विभाग में भेजे जाते हैं। पुणे से नमूने की जांच में सकारात्मक रिपोर्ट की पुष्टि होने पर उपाय योजना आरंभ की जाती है।   

पशुपालकों से नहीं मिली जानकारी
दुधारु जानवरों की संदिग्ध अवस्था में मौत होने पर ही पोस्टमार्टम कराया जाता है। जानवर की मौत पर पशुपालक अथवा पशु कल्याण से जुड़ी एनजीओ से शिकायत के आधार पर पोस्टमार्टम करते हैं। पोस्टमार्टम में अब तक ‘लम्पी’ जैसे लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं। -डॉ. युवराज केने, सहायक आयुक्त, महाराजबाग चिकित्सालय

जिले में ‘लम्पी’ का प्रभाव नहीं
जिले में दुधारु जानवरों में अभी तक ‘लम्पी’ संक्रमण नहीं पाया गया है। संक्रामक बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच के लिए नमूने भेजते हैं। शहरी क्षेत्र में जानवरों को संक्रमित बीमारी के मनपा के पशुचिकित्सा विभाग में जानकारी हो सकती है।
-डॉ. मंजूषा पुंडलिक, उपसंचालक, पशुसंवर्धन विभाग